सीजी भास्कर 26 अगस्त
नई दिल्ली।
आज पूरे देश में महिलाएं बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ हरतालिका तीज व्रत मना रही हैं। यह पर्व खासकर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे उत्तर भारतीय राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है। वहीं, दक्षिण भारत में इसे “गौरी हब्बा” कहा जाता है, जहां भक्त देवी गौरी की पूजा कर स्वर्ण गौरी व्रत रखते हैं।
हरतालिका तीज का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार यह व्रत भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है।
- विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और दांपत्य जीवन की खुशहाली के लिए उपवास रखती हैं।
- अविवाहित लड़कियां मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से यह व्रत करती हैं।
यह व्रत निर्जला उपवास के रूप में रखा जाता है, जिसमें महिलाएं 24 घंटे तक बिना जल और भोजन ग्रहण किए भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं।
हरतालिका तीज 2025: शुभ मुहूर्त
- तिथि प्रारंभ: 25 अगस्त दोपहर 12:34 बजे
- तिथि समाप्त: 26 अगस्त दोपहर 1:54 बजे
- व्रत तिथि: 26 अगस्त (उदयातिथि अनुसार)
- व्रत पारण: 27 अगस्त सुबह 5:57 बजे
पूजन के विशेष मुहूर्त
- प्रातःकालीन पूजन: सुबह 5:56 बजे से 8:31 बजे तक (2 घंटे 35 मिनट)
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:57 से दोपहर 12:48 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:31 बजे से 3:23 बजे तक
हरतालिका तीज व्रत विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करें।
- फूल, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- व्रत कथा का श्रवण करें और आरती करें।
- शाम को पुनः शिव-पार्वती की पूजा कर अर्घ्य अर्पित करें।
- अगले दिन प्रातःकाल व्रत का पारण करें।
पूजन सामग्री
पूजा में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री इस प्रकार है:
- भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मिट्टी की मूर्तियां
- पीले वस्त्र, बेलपत्र, शमी पत्र, सुपारी, रोली, जनेऊ, अक्षत
- कलश, गंगाजल, दूर्वा, घी, कपूर, दही
- केले का पत्ता और फूल-फल
- माता पार्वती के श्रृंगार हेतु सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी और कुमकुम