सीजी भास्कर, 29 मार्च। हरियाणा सरकार दिवंगत योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी के गुरुग्राम स्थित अपर्णा आश्रम का प्रबंधन और नियंत्रण अपने हाथ में लेने जा रही है. इससे जुड़े बिल अपर्णा संस्था (प्रबंधन और नियंत्रण का अधिग्रहण) विधेयक, 2025 को शुक्रवार (28 मार्च) को विधानसभा की मंजूरी मिली. धीरेंद्र ब्रह्मचारी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के योग गुरु थे.
Dhirendra Brahmchari Aparna Ashram
गुरुग्राम जिले के गांव सिलोखरा की राजस्व संपदा के भीतर स्थित अपर्णा संस्था के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए सीमित अवधि के लिए विधेयक में जनहित में नियंत्रण में लेने का प्रावधान है.
कांग्रेस ने किया विरोध
कांग्रेस ने इस बिल का विरोध किया. पार्टी विधायक बी बी बत्रा ने सदन में कहा, “यह विधेयक इस विधानसभा में पेश नहीं किया जा सकता, इस विधेयक को इस सदन में पेश करना गैरकानूनी है, यह संविधान के साथ धोखाधड़ी है…यह सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है.”
उनके दावों पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह विधेयक केंद्र सरकार के किसी कानून को दरकिनार नहीं करता, बल्कि उसके अनुपालन में सभी आवश्यक प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं.
नई दिल्ली में है पंजीकृत कार्यालय
कांग्रेस नेता बत्रा ने कहा, ”धीरेंद्र ब्रह्मचारी की सोसायटी दिल्ली में पंजीकृत है, हरियाणा में नहीं. अगर सोसायटी के सदस्यों के बीच कोई विवाद है और अगर किसी के पास प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार है, तो वह दिल्ली सरकार के पास है. सोसायटी हरियाणा अधिनियम के तहत पंजीकृत नहीं है.”
प्रसिद्ध योग गुरु स्वामी धीरेंद्र ब्रह्मचारी की जून 1994 में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. विधेयक के अनुसार, ब्रह्मचारी का मानना था कि योग उन सभी समस्याओं और बीमारियों का एकमात्र समाधान है, जो एलोपैथिक या अन्य प्रकार के उपचारों से ठीक नहीं हो सकती हैं. उन्होंने योग को लोकप्रिय बनाने और इसके लाभों के बारे में बात करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.
धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत अपर्णा आश्रम नाम से सोसायटी को पंजीकृत कराया था. जिसका पंजीकृत कार्यालय नई दिल्ली में है.
उनका उद्देश्य शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण और प्रसार के माध्यम से आम जनता के बीच योग के ज्ञान को फैलाना था. धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने संस्था के ज्ञापन (एमओएल) के माध्यम से एक अलग इकाई के तौर पर अपर्णा नाम से एक संस्था भी बनाई और इसकी स्वतंत्र शासी परिषद का गठन किया.
ब्रह्मचारी ने केंद्र सरकार से समय-समय पर प्राप्त दान की मदद से अपर्णा आश्रम के नाम पर गुरुग्राम की राजस्व सम्पदा के भीतर स्थित 24 एकड़ से अधिक भूमि खरीदी. संस्था गुरुग्राम के सेक्टर 30 के पास स्थित है.
बिल में क्या लिखा है?
बिल के अनुसार, पिछले कई वर्षों से सोसायटी और इसके सदस्यों के बीच विवाद चल रहा है और पिछले दो दशकों से अधिक समय से ये समूह एक-दूसरे के साथ मुकदमेबाजी कर रहे हैं. ये समूह अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए संस्था के उद्देश्यों के खिलाफ संस्था की भूमि और भवन को अवैध और अनधिकृत रूप से बेचने की कोशिश कर रहे हैं.
विधेयक के अनुसार, इस बात की पूरी संभावना है कि संस्था की चल व अचल संपत्ति नष्ट हो सकती है, जिससे संस्था का मूल उद्देश्य ही विफल हो जाएगा.
बिल को लेकर कांग्रेस सदस्य बत्रा ने जानना चाहा कि संविधान के किस प्रावधान के तहत विधानसभा में विधेयक लाया गया है.
इसपर मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि इसे संविधान के अनुच्छेद 31-ए के तहत पेश किया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार सोसायटी या संस्था का स्वामित्व अपने हाथ में नहीं ले रही है. उन्होंने बत्रा से कहा कि कोई भी संपत्ति, जिसमें विवाद है, जिसने सरकार से अनुदान लिया है, सरकार प्रशासक नियुक्त कर सकती है.
कितनी है जमीन की कीमत?
उन्होंने कहा कि कुल भूमि 24 एकड़ से अधिक है, जिसका वर्तमान अनुमानित बाजार मूल्य 2400 करोड़ रुपये है. हम नहीं चाहते कि भूमि गलत हाथों में जाए, इसलिए विधेयक लाया जा रहा है.
कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा, “यह एक गंभीर मुद्दा है और इसे जितना सरल बनाया जा रहा है, उतना नहीं है. हम सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं.” कांग्रेस सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया.