सीजी भास्कर, 17 मार्च। राजधानी के Dr. Bhimrao Ambedkar Memorial Hospital ने एक ऐसी चिकित्सा उपलब्धि (Heart Tumor Surgery India) हासिल की है, जिसने प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में चर्चा बटोर ली है। यहां डॉक्टरों की टीम ने 11 साल के बच्चे के दिल से चिपके बेहद दुर्लभ स्टेज-3 इनवेसिव थायमिक कैंसर (टाइप-बी थायमोमा) को सफलतापूर्वक निकालकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया है।
सबसे खास बात यह है कि इस तरह के कैंसर का अब तक दर्ज सबसे कम उम्र का मरीज 12 साल का था, जबकि इस केस में 11 साल के बच्चे का सफल इलाज किया गया है।
दिल और कई अहम अंगों से चिपका था ट्यूमर
डॉक्टरों के अनुसार यह ट्यूमर हृदय, पेरिकार्डियम, फ्रेनिक नर्व, एओर्टा, पल्मोनरी आर्टरी, लेफ्ट एट्रियम और फेफड़े से चिपका हुआ था। ऐसे मामलों में सर्जरी करना बेहद जोखिम भरा होता है और ट्यूमर को पूरी तरह निकाल पाना लगभग असंभव माना जाता है। लेकिन अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रमुख Dr. Krishnakant Sahu और उनकी टीम ने चुनौती स्वीकार करते हुए सफल ऑपरेशन किया।
ड्यूल एप्रोच तकनीक से चार घंटे चली जटिल सर्जरी
ट्यूमर के बड़े आकार और जटिल स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने ड्यूल एप्रोच तकनीक अपनाई। इसमें छाती की हड्डी (स्टर्नम) और पसलियों के पास से एक साथ सर्जरी की गई। करीब चार घंटे तक चली इस सर्जरी में हार्ट-लंग मशीन की मदद (Heart Tumor Surgery India) ली गई। इस दौरान हार्ट की झिल्ली, फेफड़े के हिस्से और फ्रेनिक नर्व को भी सावधानीपूर्वक हटाया गया, साथ ही लेफ्ट एट्रियम की मरम्मत भी की गई।
निकाले गए ट्यूमर का आकार करीब 12×8 सेंटीमीटर और वजन लगभग 400 ग्राम था, जो इस उम्र के बच्चे के लिए बेहद असामान्य माना जाता है।
छह महीने से थी परेशानी, कई अस्पतालों ने किया था मना
चांपा निवासी यह बच्चा पिछले छह महीने से छाती में दर्द, भारीपन और सांस फूलने जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। जांच में गंभीर ट्यूमर का पता चला, जिसके बाद कई अस्पतालों ने ऑपरेशन से मना कर दिया था। अंततः अंबेडकर अस्पताल में जोखिम भरी सर्जरी का फैसला लिया गया और परिजनों की सहमति के बाद टीम ने यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन किया।
सर्जरी के बाद रेडिएशन, अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ
ऑपरेशन के बाद बायोप्सी में कैंसर की पुष्टि हुई, जिसके बाद मरीज को 25 साइकिल रेडिएशन थेरेपी दी गई। करीब छह महीने बाद अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और दोबारा स्कूल (Heart Tumor Surgery India) जाना शुरू कर चुका है। उसने हाल ही में कक्षा छठवीं की परीक्षा भी दी है, जो इस सफलता की सबसे बड़ी मिसाल है।
राष्ट्रीय स्तर पर सराहना, अंतरराष्ट्रीय जर्नल में जाएगी केस स्टडी
इस दुर्लभ सर्जरी को राष्ट्रीय कैंसर सर्जरी सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया, जहां इसे बेस्ट पेपर अवार्ड से सम्मानित किया गया। अब इस केस को अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित करने की तैयारी की जा रही है। यह उपलब्धि न सिर्फ डॉक्टरों की विशेषज्ञता को दर्शाती है, बल्कि प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की क्षमता को भी नई पहचान देती है।





