सीजी भास्कर, 02 जनवरी। अफगानिस्तान में एक बार फिर सत्ता के भीतर बड़ा बदलाव देखने (Hibatullah Akhundzada Order) को मिला है। तालिबान के सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा के सीधे आदेश पर प्रशासनिक और सैन्य ढांचे में व्यापक फेरबदल किया गया है। इस फैसले के तहत कुल 25 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियां की गई हैं, जिनमें गवर्नर, सैन्य कोर कमांडर, डिप्टी कमांडर और जिला स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
आंतरिक और रक्षा मंत्रालय पर सबसे ज्यादा असर
तालिबान सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा प्रभाव आंतरिक मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय पर पड़ा है। कई मौजूदा अधिकारियों को हटाकर नई जिम्मेदारियां सौंपी (Hibatullah Akhundzada Order) गई हैं, जबकि कुछ को बिल्कुल अलग प्रांतों में भेज दिया गया है। जानकारों का मानना है कि यह बदलाव सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि सत्ता पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
नए गवर्नर, पुराने चेहरे नई जगह
तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने बताया कि
कारी गुल हैदर शफाक को बामियान का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है।
मौजूदा बामियान गवर्नर अब्दुल्ला सरहदी को जौजजान प्रांत की कमान सौंपी गई है।
अहमद शाह दिंडोस्त अब सर-ए-पुल प्रांत के गवर्नर होंगे।
लगमान में अंजार गुल अब्दुल्ला को उप-गवर्नर बनाया गया है।
इसके अलावा कंधार में जिला गवर्नर, सैन्य कमांडर और आयुक्त स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं।
सेना में 15 बड़े तबादले, सिविल अफसरों को मिली वर्दी
रक्षा मंत्रालय के तहत 15 अहम सैन्य फेरबदल किए गए हैं।
सर-ए-पुल के पूर्व गवर्नर को 205वीं अल-बद्र कोर का कमांडर बनाया गया है।
पंजशीर की विशेष ब्रिगेड के पूर्व उप-कमांडर को इसी कोर का डिप्टी कमांडर नियुक्त किया गया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि दो सिविल अधिकारियों को सीधे सैन्य पद सौंपे गए हैं।
हेलमंद में ग्रामीण विकास के पूर्व उप मंत्री को 217वीं ओमारी कोर का चीफ ऑफ स्टाफ बनाया गया।
आवास और शहरी विकास विभाग के पूर्व प्रमुख को 205वीं अल-बद्र कोर की इन्फैंट्री ब्रिगेड का कमांडर बनाया गया है।
विशेषज्ञों की राय: वफादारी सबसे बड़ा पैमाना
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इन नियुक्तियों में पेशेवर योग्यता या प्रशासनिक अनुभव से ज्यादा धार्मिक निष्ठा, युद्ध का अनुभव और अखुंदजादा के प्रति वफादारी को तरजीह (Hibatullah Akhundzada Order) दी गई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि तालिबान शासन में वास्तविक शक्ति मंत्रियों की बजाय सीधे सर्वोच्च नेता के हाथों में सिमटती जा रही है।
अफगानिस्तान की राजनीति में क्या बदलेगा?
इस बड़े फेरबदल के बाद यह तय माना जा रहा है कि अफगानिस्तान में सत्ता संरचना और ज्यादा केंद्रीकृत होगी। आने वाले समय में इससे प्रशासनिक फैसलों की रफ्तार तो बढ़ सकती है, लेकिन आंतरिक असंतोष और अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।





