सीजी भास्कर, 12 अक्टूबर। हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने स्वामी रामभद्राचार्य के खिलाफ इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्मों पर चल रहे कथित आपत्तिजनक वीडियो (High Court Order on Defamatory Content) को 48 घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने मेटा प्लेटफॉर्म्स इंक और गूगल एलएलसी (Social Media Regulation by Court) को निर्देश दिया कि याचियों से यूआरएल लिंक प्राप्त कर संबंधित वीडियो को हटाया जाए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को निर्धारित की है।
शरद चंद्र श्रीवास्तव व अन्य की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया कि स्वामी रामभद्राचार्य की आंखों की रोशनी बचपन में ही चली गई थी, और यूट्यूबर शशांक शेखर फेसबुक, इंस्टाग्राम व अन्य माध्यमों पर उनकी दिव्यांगता को लेकर अपमानजनक वीडियो (Online Defamation Case) चला रहे हैं।
याचिका में केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया गया कि इस प्रकार की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए ठोस नियम बनाए जाएं और उनका सख्ती से पालन कराया जाए। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कार्य करने वाले राज्य आयुक्त कार्यालय ने संबंधित यूट्यूबर को नोटिस जारी कर 18 अक्टूबर को हाजिर होने का निर्देश दिया है।


