सीजी भास्कर, 29 अगस्त। रेलवे कोचिंग यार्ड में करंट लगने से हुई ठेका मजदूर की मौत ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। घटना को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट ने रेलवे के रवैये पर नाराजगी जताते हुए रेलवे जीएम को तीन दिन में शपथपत्र के साथ रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
हादसे की पूरी कहानी
जांजगीर-चांपा के मुलमुला निवासी प्रताप बर्मन रेलवे में ठेका मजदूर के रूप में काम करता था। 23 अगस्त को वह बिलासपुर कोचिंग डिपो में वंदे भारत ट्रेन के एक कोच की मरम्मत कर रहा था।
इसी दौरान वह OHE तार से करंट की चपेट में आ गया। इलाज के दौरान गुरुवार को उसकी मौत हो गई।
परिजनों का आरोप है कि बिना बिजली सप्लाई बंद किए ही प्रताप को कोच के ऊपर भेजा गया। यह रेलवे अधिकारियों और ठेकेदार की गंभीर लापरवाही है।
हाईकोर्ट ने लगाई फटकार
मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पाया कि रेलवे अधिकारियों ने कोर्ट से मजदूर की मौत की जानकारी छुपाई।
इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने जीएम से पूछा है कि हादसे की जांच, इलाज, मुआवजे और ठेकेदार पर कार्रवाई का पूरा विवरण शपथपत्र के साथ तीन दिन में पेश करें। अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
परिजनों का गुस्सा भड़का
मृतक के परिजन मुआवजा और नौकरी की मांग कर रहे हैं।
पत्नी खुशबू बर्मन का कहना है कि हादसे ने उसका सब कुछ छीन लिया है। गोद में छोटा बच्चा है, परिवार कैसे चलेगा? परिजनों ने चेतावनी दी है कि जब तक मांगे पूरी नहीं होतीं, वे शव रखकर डीआरएम ऑफिस के सामने प्रदर्शन करेंगे।
विधायक का आरोप – रेलवे की बड़ी लापरवाही
धरना स्थल पर पहुंचीं पामगढ़ की विधायक शेष राज हरवंश ने कहा कि रेलवे और ठेकेदार ने इलाज और सुरक्षा दोनों में लापरवाही की।
इलाज का खर्च परिजनों से वसूला गया, जबकि हादसे की जिम्मेदारी रेलवे और ठेकेदार की थी। उन्होंने कहा कि जब तक मृतक के परिवार को न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा।