सीजी भास्कर, 26 दिसंबर। प्रदेश में नेशनल हाईवे पर आवारा मवेशियों के कारण हो रहे जानलेवा सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। (Highway Cattle Accident) की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए एनएचएआइ के पास प्रदेश में फिलहाल लगभग 700 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग हैं।
इन मार्गों पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हांकित कर 70 स्थानों पर 20-20 मीटर लंबे क्रैश बैरियर लगाए जा रहे हैं, ताकि अचानक सड़क पर आने वाले पशुओं से टक्कर की आशंका कम हो सके और (Highway Cattle Accident) पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। इसके साथ ही दो बड़े गो-आश्रय भी बनाए जा रहे हैं, जहां हाईवे के आसपास घूमने वाले आवारा मवेशियों को सुरक्षित रखा जाएगा।
बता दें कि बीते एक वर्ष में पशुओं से टकराव के 300 से अधिक हादसों में 189 से ज्यादा लोगों की मौत और सैकड़ों के घायल होने के बाद यह ठोस कदम उठाए गए हैं। एनएचएआइ का दावा है कि इन उपायों से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार होगा और (Highway Cattle Accident) की संख्या में भारी गिरावट आएगी।
सड़कों में दिखेंगे डिजिटल संदेश
पशुओं को डराए बिना और बिना बल प्रयोग के शांतिपूर्वक सड़क के किनारे या सुरक्षित होल्डिंग क्षेत्र में ले जाया जाएगा। इसके लिए स्थानीय पुलिस और राज्य की संबंधित टीमों की मदद ली जाएगी। जब तक पशु को सड़क से नहीं हटाया जाएगा, तब तक यात्रियों को सतर्क करने के लिए 100 से 150 मीटर पहले चेतावनी बोर्ड, वीएमएस पर ‘सावधान आगे पशु हैं’ का संदेश और रिफ्लेक्टिव बैरिकेड्स लगाए जाएंगे, ताकि (Highway Cattle Accident) से बचाव किया जा सके।
पेट्रोलिंग, रोशनी और सोलर ब्लिंकर
हाईवे पर निगरानी मजबूत करने के लिए हर 50 किलोमीटर पर पेट्रोलिंग टीम तैनात की जा रही है। ये टीमें लगातार गश्त कर पशुओं को सड़क से हटाने और (Highway Cattle Accident) जैसी घटनाओं को रोकने का काम करेंगी। जिन इलाकों में पशुओं की आवाजाही ज्यादा पाई गई है, वहां अतिरिक्त स्ट्रीट लाइटिंग की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा रात के समय वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए 200 स्थानों पर सोलर ब्लिंकर लगाए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद एक्शन प्लान
राष्ट्रीय राजमार्गों को मवेशियों और लावारिस पशुओं से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने एक्शन प्लान लागू कर दिया है। यह पहल सुप्रीम कोर्ट द्वारा सात नवंबर को दिए गए निर्देशों के बाद की गई है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने इसके लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है, जिसे एनएचएआइ ने 19 दिसंबर से लागू कर दिया है।
1033 पर एक कॉल, तुरंत रेस्क्यू
नई एसओपी के तहत आम जनता की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। यदि किसी नागरिक या यात्री को राष्ट्रीय राजमार्ग पर पशु दिखाई देता है तो वह टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1033 पर सूचना दे सकता है। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम तत्काल मौके पर पहुंचेगी। एनएचएआइ टोल प्लाजा, रेडियो और अखबारों के माध्यम से इस नंबर का व्यापक प्रचार करेगा।
आधुनिक तकनीक से होगी निगरानी
नई एसओपी में आधुनिक तकनीक और सख्त प्रोटोकाल शामिल किए गए हैं। इसके तहत रूट पेट्रोल वाहन (आरपीवी) चौबीसों घंटे गश्त करेंगे और सभी आरपीवी में डैशबोर्ड कैमरे अनिवार्य किए गए हैं। एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम से पशुओं की पहचान की जाएगी। हर घटना का स्थान जीपीएस कोआर्डिनेट्स के साथ दर्ज होगा, ताकि उन हाटस्पाट्स की पहचान की जा सके, जहां बार-बार (Highway Cattle Accident) की स्थिति बनती है। ऐसे स्थानों पर आगे चलकर सीसीटीवी, फेंसिंग और बेहतर प्रकाश व्यवस्था की जाएगी।
फैक्ट फाइल
प्रदेश में एनएचएआइ के अधीन सड़कें : 700 किमी
पशुओं से हुए हादसे (एक वर्ष) : 300 से अधिक
हादसों में मौतें : 189
क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे : 70 स्थानों पर
क्रैश बैरियर की लंबाई : 20-20 मीटर
प्रस्तावित गो-आश्रय : 2
सोलर ब्लिंकर : 200 स्थानों पर
हेल्पलाइन नंबर : 1033


