HIV Patient Harassment Jagdalpur: जगदलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक एचआईवी संक्रमित प्रसूता के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं। परपा थाना क्षेत्र में दर्ज इस प्रकरण में महिला का आरोप है कि इलाज के दौरान उसकी निजी जानकारी सार्वजनिक कर दी गई, जो सीधे तौर पर मरीज की गोपनीयता (patient privacy violation) का उल्लंघन है। अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर ऐसी घटना ने कई मरीजों को मानसिक रूप से असहज कर दिया है।
ड्यूटी स्टाफ पर पहचान उजागर करने का आरोप
पीड़िता का कहना है कि ड्यूटी पर मौजूद कुछ कर्मियों ने उसके एचआईवी संक्रमित होने की बात खुले में कही, जिससे वार्ड में मौजूद अन्य लोग भी यह जान गए। महिला के मुताबिक, इस दौरान उसके साथ तंज भरे शब्दों में बातचीत की गई, जिससे वह खुद को अपमानित और असहाय महसूस करने लगी। यह घटना अस्पतालों में (HIV patient rights) के पालन को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है।
प्रसव के बाद सफाई कराने का दावा, मानसिक आघात
महिला ने अपनी शिकायत में यह भी बताया कि प्रसव के बाद उससे सफाई से जुड़े काम करवाए गए, जबकि उसकी शारीरिक हालत उस समय बेहद कमजोर थी। परिजनों का कहना है कि यह व्यवहार न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि मरीज के सम्मान और गरिमा पर सीधा हमला भी है। इस तरह की घटनाएं समाज में पहले से मौजूद (stigma against HIV) को और गहरा करती हैं।
परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने दर्ज किया केस
परिजनों की लिखित शिकायत के बाद पुलिस ने स्टाफ नर्स सहित अन्य संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान जिन-जिन लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी, उन पर कानून के तहत कार्रवाई तय मानी जा रही है। इस प्रकरण ने अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
कानून के तहत गोपनीयता भंग करना दंडनीय अपराध
कानूनी जानकारों के अनुसार, भारत में लागू एचआईवी और एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2017 के तहत किसी भी संक्रमित व्यक्ति की पहचान उजागर करना अपराध की श्रेणी में आता है। इलाज, भर्ती या प्रसव के दौरान भेदभाव करना भी कानूनन प्रतिबंधित है। सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी मरीज के साथ ऐसा व्यवहार दोहराया न जाए।





