होलिका दहन की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन ज्योतिषाचार्यों की शास्त्रीय गणना के अनुसार इस वर्ष (Holi Date 2025) के तहत होलिका दहन 2 और 3 मार्च की मध्यरात्रि में करना श्रेष्ठ माना गया है। भद्रा काल के चलते सूर्यास्त के समय दहन वर्जित रहेगा, इसलिए मध्यरात्रि का मुहूर्त सबसे शुभ बताया गया है।
भद्रा काल के चलते रात में जलेगी होलिका
पंचांग के अनुसार 2 मार्च की शाम भद्रा का प्रभाव शुरू होकर 3 मार्च की सुबह तक रहेगा। धार्मिक परंपरा में भद्रा के दौरान होलिका दहन निषिद्ध माना गया है। यही वजह है कि इस बार लोगों को रात के समय होलिका दहन करना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सही मुहूर्त में किया गया होलिका दहन परिवार में सकारात्मक ऊर्जा और शांति लाता है।
चंद्रग्रहण और सूतक काल ने बदला होली का दिन
3 मार्च को चंद्रग्रहण पड़ने के कारण सूतक काल प्रभावी रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक के दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इसी कारण (Holi Date 2025) के अनुसार 3 मार्च को रंगों की होली नहीं खेली जाएगी। ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण स्नान के पश्चात अगले दिन 4 मार्च को धुलंडी मनाई जाएगी।
होलिका दहन की पूजा विधि और परिक्रमा का महत्व
होलिका दहन के समय पूजा में अक्षत, रोली, चंदन, मौली, दीपक और मिष्ठान अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद अग्नि में तिल, जौ, गुड़ और आम की लकड़ी समर्पित कर सात परिक्रमा की जाती है। मान्यता है कि इस विधि से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
राख और रंगों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं
होलिका दहन की राख को कई परिवार घर लाकर सुरक्षित रखते हैं। इसे नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। वहीं होली के रंगों का भी अपना आध्यात्मिक महत्व है—लाल ऊर्जा का, पीला शुभता का, हरा समृद्धि का और गुलाबी प्रेम का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि (Holi Date 2025) केवल एक पर्व नहीं, बल्कि परंपरा और विश्वास का उत्सव भी है।






