सीजी भास्कर 18 जनवरी Homecoming in Bastar : कांकेर जिले के पीढ़ापाल गांव में रविवार को एक अहम सामाजिक घटनाक्रम सामने आया। 50 से अधिक परिवारों से जुड़े करीब 200 लोगों ने सामूहिक रूप से अपने पारंपरिक धर्म और रीति-रिवाजों की ओर लौटने का फैसला लिया। यह निर्णय गांव और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से चल रहे संवाद के बाद सामने आया।
घटना के दौरान मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद गंगाजल छिड़काव और पारंपरिक विधियों के साथ घर वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई। कार्यक्रम में 25 गांवों के समाज प्रमुख, बुजुर्ग और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्होंने लौटने वाले परिवारों का सम्मानपूर्वक स्वागत किया।
इस पहल में पीढ़ापाल के अलावा धनतुलसी, मोदे, साल्हेभाट, किरगापाटी और तरांदुल जैसे गांवों के लोग शामिल रहे। समाज के लोगों के अनुसार, यह कदम किसी दबाव में नहीं, बल्कि आपसी सहमति और सांस्कृतिक जुड़ाव के आधार पर उठाया गया।
सर्व समाज से जुड़े ईश्वर कावड़े ने बताया कि बीते कई महीनों से समाज के भीतर संवाद चल रहा था। उन्होंने कहा कि यह (Community Return Process) विश्वास और सामाजिक एकजुटता का नतीजा है। अभी भी कुछ परिवार हैं जिन्होंने इच्छा जताई है और वे आने वाले समय में इसी प्रक्रिया से जुड़ सकते हैं।
इतनी बड़ी संख्या में हुई घर वापसी को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी रही। अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र में फिलहाल शांति का माहौल है और किसी तरह की असहज स्थिति सामने नहीं आई है। सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस फैसले से समाज में सकारात्मक संदेश गया है। लोगों ने इसे (Bastar Social Harmony) की दिशा में एक कदम बताया, जहां परंपरा, संवाद और सामूहिक निर्णय को प्राथमिकता दी गई।


