सीजी भास्कर, 17 मार्च। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के बीच भारत के लिए राहत की पहली किरण दिखाई (Hormuz Crisis India) देने लगी है। जिन जहाजों पर देश की ऊर्जा आपूर्ति टिकी थी, वे अब सुरक्षित रास्ता पार कर धीरे-धीरे भारतीय तट की ओर लौट रहे हैं।
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़े तनाव ने इस अहम समुद्री मार्ग को प्रभावित किया, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल और गैस सप्लाई पर असर पड़ा। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा, लेकिन कूटनीतिक प्रयासों और नौसेना की सक्रियता के चलते अब हालात संभलते नजर आ रहे हैं।
एलपीजी टैंकरों की एंट्री से मिली बड़ी राहत
सबसे अहम बात यह रही कि एलपीजी लेकर आ रहे जहाजों की सुरक्षित वापसी शुरू हो गई है। ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नाम के टैंकर क्रमशः 16 और 17 मार्च को भारत पहुंच चुके हैं। इन दोनों जहाजों के जरिए करीब 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी देश में पहुंची है, जिससे गैस सप्लाई पर पड़ा दबाव कुछ हद तक कम हुआ है।
इसके अलावा ‘जग प्रकाश’, ‘जग लाडकी’ और ‘देश विभोर’ जैसे टैंकर भी इस संवेदनशील मार्ग को पार (Hormuz Crisis India) कर चुके हैं या भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें से ‘जग लाडकी’ करीब 80,800 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आ रहा है, जबकि ‘जग प्रकाश’ के 21 मार्च तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
नौसेना की निगरानी बनी सुरक्षा कवच
इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय नौसेना की भूमिका बेहद अहम रही है। खाड़ी क्षेत्र में तैनात युद्धपोत लगातार इन व्यापारिक जहाजों की निगरानी कर रहे हैं और उन्हें सुरक्षित मार्ग से निकालने के लिए एस्कॉर्ट भी कर रहे हैं। इसी रणनीति के चलते न सिर्फ जहाज सुरक्षित निकल पाए, बल्कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति भी पूरी तरह बाधित होने से बच गई।
क्यों अहम है होर्मुज का रास्ता?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू कीमतों पर पड़ता है। इस बार भी यही देखने को मिला – सप्लाई बाधित होते ही कई जगहों पर गैस की कमी और कीमतों में उछाल की शिकायतें सामने आने लगीं।
जमीनी असर: होटल-रेस्तरां तक पहुंचा संकट
गैस की कमी का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि होटल और रेस्तरां व्यवसाय भी प्रभावित (Hormuz Crisis India) हुए। कई जगहों पर व्यवसायियों को वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेना पड़ा। इस बीच विपक्ष ने सरकार की तैयारी पर सवाल उठाए, जबकि सरकार का कहना है कि हालात को काबू में रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और आपूर्ति को सामान्य बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
अब आगे क्या?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर तनाव लंबा खिंचता है, तो ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि, फिलहाल भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी ने एक बड़ा संकट टलने का संकेत जरूर दे दिया है।





