सीजी भास्कर, 11 दिसंबर। दुर्ग जिले के किसान आज तेजी से उद्यानिकी फसलों (Horticulture Farming Durg) की ओर अग्रसर हो रहे हैं। केंद्र एवं राज्य सरकार की उद्यानिकी प्रोत्साहन योजनाओं से मिलने वाले अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन और वैज्ञानिक खेती पद्धति ने उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। जिले में ऑयल पाम, फलदार पौधों, सब्जियों और पुष्प उत्पादन में उल्लेखनीय विस्तार दर्ज किया गया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है। यह पूरा परिवर्तन मॉडल के रूप में प्रदेश में उदाहरण बन रहा है।
ऑयल पाम खेती से बढ़ी आय
नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल पाम योजना वर्ष 2025-26 के तहत 47 कृषकों के 95.04 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम रोपण किया गया है। पिछले वर्ष 37 किसान 74.61 हेक्टेयर क्षेत्र में लाभान्वित हुए थे। धमधा विकासखंड के ग्राम टेमरी के कृषक योगेश साहू ने विभागीय अनुदान से 8 एकड़ में ऑयल पाम पौधरोपण कर हर डेढ़ से दो माह में कटाई पूरी करते हुए प्रति सीजन 1.5 से 2 लाख रुपये तक की आय अर्जित की है। उनकी सफलता से प्रेरित होकर अन्य किसान भी इस लाभकारी फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
केला, पपीता, ड्रैगन फ्रूट का विस्तार
एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत 152 हेक्टेयर क्षेत्र में केला, पपीता व ड्रैगन फ्रूट की खेती से 99 कृषक लाभान्वित हो रहे हैं। इसी योजना में 64 हेक्टेयर क्षेत्र में टमाटर, बैंगन और प्याज जैसी सब्जियों का विस्तार कर 58 किसानों की आमदनी बढ़ी है। जिले में 50 हेक्टेयर क्षेत्र में 71 कृषक गेंदा फूल उत्पादन कर उल्लेखनीय पैदावार ले रहे हैं। ग्राम मलपुरीकला के कृषक अरुण कुमार ने 2 हेक्टेयर में गेंदा उत्पादन कर अच्छी आय अर्जित की।
ग्राफ्टेड सब्जियों से ऊँची कमाई
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (Horticulture Farming Durg) के तहत चयनित 46 किसान ग्राफ्टेड बैंगन व टमाटर की खेती कर लाभान्वित हुए हैं। ग्राम टेमरी के कृषक हितेश टॉक ने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में 9 एकड़ में ग्राफ्टेड बैंगन लगाकर प्रति एकड़ 40 टन उत्पादन लिया और लगभग 48 लाख रुपये की आय अर्जित की, जो जिले में (Horticulture Farming Durg) की सफलता का बड़ा उदाहरण है।
फलदार पौधों से भविष्य की आय सुनिश्चित
राज्य पोषित समेकित उद्यानिकी विकास योजना के अंतर्गत किसान अपनी खाली भूमि में नींबू, अमरूद, कटहल, आम और आंवला के पौधे लगा रहे हैं, जिससे आने वाले वर्षों में आय के नए स्रोत विकसित होंगे। दुर्ग जिले में उद्यानिकी आधारित खेती ने किसानों की आजीविका को मजबूत किया है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की है।


