नवा रायपुर: IIM Raipur Convocation 2026 : भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में आज एक विशेष गरिमापूर्ण उपस्थिति रही। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर मुख्य अतिथि के रूप में इस समारोह में शामिल हुए। उन्होंने भविष्य के प्रबंधकों को न केवल डिग्री प्रदान की, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में मैनेजमेंट और लीडरशिप के आधुनिक गुर भी सिखाए।
एयरपोर्ट पर भव्य स्वागत
विदेश मंत्री शनिवार सुबह रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पहुंचे। उनके आगमन पर छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और IIM रायपुर के प्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत किया। एयरपोर्ट से विदेश मंत्री का काफिला सीधे नवा रायपुर स्थित IIM परिसर के लिए रवाना हुआ।
विद्यार्थियों को दिए सफलता के सूत्र
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. एस. जयशंकर ने अपने कूटनीतिक अनुभवों को मैनेजमेंट के सिद्धांतों से जोड़कर साझा किया। उन्होंने छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:
- वैश्विक दृष्टिकोण (Global Outlook): उन्होंने कहा कि आज के दौर में मैनेजर को केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार और राजनीति की समझ होनी चाहिए।
- लीडरशिप और निर्णय क्षमता: कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और सही समय पर सटीक निर्णय लेने को ही असली लीडरशिप बताया।
- करियर और नवाचार: उन्होंने युवाओं को लीक से हटकर सोचने और देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
डिग्री और मेडल का वितरण
समारोह के दौरान विभिन्न विषयों के सफल विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को विदेश मंत्री के हाथों गोल्ड और सिल्वर मेडल से नवाजा गया। इस गौरवशाली क्षण के दौरान छात्रों के चेहरों पर मुस्कान और अभिभावकों की आंखों में गर्व साफ देखा जा सकता था।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
विदेश मंत्री के दौरे को देखते हुए नवा रायपुर और एयरपोर्ट रोड पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष पुलिस बल तैनात रहा। कार्यक्रम के समापन के बाद विदेश मंत्री दोपहर में वापस दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
“मैनेजमेंट का मतलब सिर्फ दफ्तर संभालना नहीं, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की ताकत को दुनिया के सामने सही तरीके से पेश करना भी है।” — डॉ. एस. जयशंकर (समारोह के दौरान संक्षिप्त संदेश)


