Illegal Opium Farming : दुर्ग जिले के ग्रामीण इलाके में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मक्के की फसल के बीच छिपाकर अफीम की खेती किए जाने का खुलासा हुआ है। पुलिस को मिली गोपनीय सूचना के बाद 6 मार्च को समोदा और झिंझरी गांव की सीमा पर स्थित एक खेत में छापेमारी की गई। मौके पर पहुंची टीम ने जब खेत का निरीक्षण किया तो मक्के की कतारों के बीच अफीम के पौधे लगे हुए पाए गए। प्रारंभिक जांच में करीब डेढ़ से दो एकड़ जमीन पर यह अवैध खेती होने की पुष्टि हुई है।
ग्रामीणों का दावा: चार से पांच एकड़ में भी हो सकती है खेती
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि खेत का दायरा इससे भी बड़ा हो सकता है। गांव के कुछ लोगों के अनुसार मक्के और अन्य फसलों की आड़ में चार से पांच एकड़ तक अफीम की खेती किए जाने की आशंका है। हालांकि प्रशासन ने फिलहाल डेढ़ से दो एकड़ क्षेत्र में पौधे मिलने की पुष्टि की है और बाकी हिस्सों की भी जांच की जा रही है।
सरपंच ने लगाए आरोप, राजनीतिक कनेक्शन की चर्चा
इस मामले में समोदा गांव के सरपंच अरुण गौतम ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस खेत में अफीम की खेती मिली है, वह जमीन भाजपा किसान मोर्चा से जुड़े पदाधिकारी विनायक ताम्रकर और बृजेश ताम्रकर से संबंधित बताई जा रही है। सरपंच के मुताबिक, जब इस मामले की जानकारी देने वाले एक पंच ने आवाज उठाई तो उसके साथ मारपीट भी की गई।
आरोपों से इनकार, जमीन अधिया पर देने की बात
दूसरी ओर, भाजपा से जुड़े नेताओं ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्हें खेत में अफीम की खेती की कोई जानकारी नहीं थी। उनके मुताबिक, जमीन खेती के लिए अधिया पर दी गई थी और संभव है कि कुछ लोग चोरी-छिपे वहां अफीम के पौधे लगा रहे हों। उन्होंने यह भी कहा कि वे सिर्फ खेत की स्थिति देखने के लिए वहां पहुंचे थे।
मौके पर पहुंची प्रशासनिक टीम, नमूने किए गए जब्त
छापेमारी के दौरान पुलिस के साथ तहसीलदार और राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। खेत में मौजूद पौधों की जांच की गई और उनके नमूने एकत्र किए गए। अंधेरा होने के कारण कार्रवाई को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा, जिसके बाद अगले दिन फिर से निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई। संभावना है कि मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में विशेषज्ञों की टीम भी जांच में शामिल होगी।
करोड़ों रुपये की कीमत का अनुमान, जांच जारी
प्रशासन के शुरुआती अनुमान के अनुसार खेत में उगाई गई अफीम की संभावित कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है। फिलहाल पुलिस जमीन के वास्तविक मालिकों और खेती करने वाले लोगों की पहचान करने में जुटी है। कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
फोटो से मिला सुराग, दो दिन पहले हुई थी सूचना
सरपंच अरुण गौतम के मुताबिक उन्हें इस खेती की जानकारी दो दिन पहले एक फोटो के जरिए मिली थी। फोटो देखने के बाद उन्होंने इंटरनेट के माध्यम से इसकी पुष्टि की और 5 मार्च को पुलिस को इसकी सूचना दी। उनका दावा है कि लंबे समय से मक्के और दूसरी फसलों की आड़ में अफीम की खेती की जा रही थी।





