सीजी भास्कर, 26 दिसंबर। मनेन्द्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर स्थित भूमि खसरा नंबर 217 में लगातार रकबा वृद्धि और अवैध प्लाटिंग (Illegal Plotting) की गंभीर शिकायत सामने आने के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। प्रशासन को प्राप्त शिकायतों में आशंका जताई गई है कि उक्त भूमि में नियमों के विपरीत रकबे में बढ़ोतरी करते हुए अवैध रूप से प्लाट काटे गए हैं,
जो न केवल राजस्व कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि भविष्य में आम नागरिकों को बड़े कानूनी विवादों में भी फंसा सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पूरे मामले की गहन जांच का निर्णय लिया है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
जिला प्रशासन के अनुसार खसरा नंबर 217 में कथित रूप से की गई अवैध प्लाटिंग (Illegal Plotting) और रकबा वृद्धि को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। प्रारंभिक परीक्षण में यह संकेत मिले हैं कि भूमि के मूल अभिलेखों और वर्तमान भौतिक स्थिति में अंतर हो सकता है।
यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह गंभीर राजस्व अनियमितता की श्रेणी में आएगा। प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियां न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि आम लोगों के साथ धोखाधड़ी का कारण भी बनती हैं।
इसी संदर्भ में कार्यालयीन आदेश क्रमांक 1843 दिनांक 13 दिसंबर 2024 तथा इसके पश्चात जारी संशोधित आदेश क्रमांक 558 दिनांक 9 अक्टूबर 2025 के माध्यम से एक संयुक्त जांच दल का गठन किया गया है।
इस जांच दल में राजस्व, नगरीय प्रशासन, तकनीकी एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल किए गए हैं। संयुक्त दल को निर्देशित किया गया है कि वह खसरा नंबर 217 से जुड़े प्रत्येक पहलू की सूक्ष्मता से जांच करे और किसी भी प्रकार की अनियमितता को दस्तावेजी प्रमाणों के साथ सामने लाए।
जांच कार्यवाही के तहत खसरा नंबर 217 का प्रत्यक्ष स्थल निरीक्षण किया जाना तय किया गया है। यह स्थल जांच 5 जनवरी 2026 (सोमवार) से 6 जनवरी 2026 (मंगलवार) तक की जाएगी।
इन दोनों दिनों में जांच दल मौके पर उपस्थित रहकर भूमि की वास्तविक स्थिति, सीमांकन, रकबा, वर्तमान उपयोग और प्लाटिंग से जुड़े तथ्यों की विस्तार से जांच करेगा। इसके साथ ही पुराने राजस्व अभिलेख, नक्शे, खसरा-खतौनी और वर्तमान भौतिक स्थिति का आपस में मिलान किया जाएगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं नियमों के विरुद्ध रकबा वृद्धि तो नहीं की गई है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस भूमि से संबंधित सभी हितबद्ध पक्षकारों की उपस्थिति जांच के दौरान अनिवार्य होगी। भूमिस्वामी, कब्जाधारी अथवा किसी भी रूप में संबंधित व्यक्ति को निर्देशित किया गया है कि वे 5 और 6 जनवरी 2026 को प्रातः 11 बजे स्थल पर उपस्थित रहें।
साथ ही उन्हें भूमि से जुड़े सभी आवश्यक वैधानिक दस्तावेज जैसे स्वामित्व प्रमाण पत्र, विक्रय पत्र, नक्शा, खसरा-खतौनी एवं अन्य अभिलेख साथ लाने होंगे, ताकि जांच निष्पक्ष और तथ्यपरक ढंग से पूरी की जा सके।
जिला प्रशासन का कहना है कि पूरी जांच प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप होगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
यदि जांच में अवैध प्लाटिंग (Illegal Plotting) या नियमविरुद्ध रकबा वृद्धि की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई से भी इंकार नहीं किया गया है। इसमें अवैध प्लाट निरस्त करना, दंडात्मक कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया शामिल हो सकती है।
प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अवैध भूमि खरीद-फरोख्त से बचें और भूमि संबंधी लेन-देन से पहले सभी वैधानिक दस्तावेजों की विधिवत जांच अवश्य करें। जिला प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि भूमि मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई तय है।


