सीजी भास्कर 12 जनवरी। देश में इनकम टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार 1 अप्रैल से नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू करने (Income Tax Act 2025) जा रही है। यह कानून करीब 64 साल पुराने इनकम टैक्स एक्ट 1961 की जगह लेगा। सरकार का दावा है कि नया कानून आम टैक्सपेयर्स के लिए ज्यादा आसान और समझने योग्य होगा।
क्यों बदला जा रहा है पुराना टैक्स कानून
इनकम टैक्स एक्ट 1961 उस समय बनाया गया था, जब देश की अर्थव्यवस्था न तो डिजिटल थी और न ही इतनी जटिल। समय के साथ इसमें सैकड़ों संशोधन होते (Income Tax Act 2025) गए, जिससे कानून भारी और उलझा हुआ बन गया। नौकरीपेशा लोगों, छोटे कारोबारियों और सीनियर सिटीज़न्स के लिए टैक्स नियम समझना मुश्किल हो गया था।
नया टैक्स कानून होगा 50% तक छोटा
सरकार के अनुसार, इनकम टैक्स एक्ट 2025 मौजूदा कानून की तुलना में लगभग 50 फीसदी छोटा होगा। इसमें आसान भाषा का इस्तेमाल किया गया है। कई गैरज़रूरी और पुराने प्रावधानों को पूरी तरह हटाया गया है, ताकि टैक्स विवाद और कानूनी मामलों में कमी आ सके।
टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं
नए कानून में टैक्स की दरों को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया है। टैक्स स्लैब वही रहेंगी, जो पहले लागू थीं। सरकार ने साफ किया है कि यह कानून रेवेन्यू न्यूट्रल है, यानी इससे सरकारी आय पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
Assessment Year का कॉन्सेप्ट खत्म
अब तक टैक्सपेयर्स को प्रीवियस ईयर और असेसमेंट ईयर जैसे शब्दों से जूझना पड़ता था। इनकम टैक्स एक्ट 2025 में इसे खत्म कर दिया गया है। अब सिर्फ टैक्स ईयर शब्द का इस्तेमाल होगा, जिससे ITR फाइल करना ज्यादा आसान हो जाएगा।
लेट रिटर्न पर भी मिलेगा TDS रिफंड
नए कानून के तहत अगर कोई टैक्सपेयर तय समय सीमा के बाद भी रिटर्न फाइल करता है, तो उसे TDS रिफंड पाने का अधिकार (Income Tax Act 2025) मिलेगा। पहले इस प्रक्रिया को लेकर कई तरह की दिक्कतें सामने आती थीं।
आने वाले बदलाव इसी कानून में होंगे शामिल
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बजट 2026-27 और आगे टैक्स से जुड़े जितने भी बदलाव होंगे—चाहे पर्सनल टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स या HUF से जुड़े नियम—सभी को इसी नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 के तहत शामिल किया जाएगा।
पहले भी हो चुकी है कोशिश
इससे पहले साल 2010 में डायरेक्ट टैक्स कोड लाने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई। 2017 में गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर अब यह नया टैक्स कानून तैयार किया गया है।


