सीजी भास्कर 1 फरवरी Income Tax Decriminalization 2026 : वित्त वर्ष 2026-27 के बजट ने टैक्स प्रशासन की सोच में बड़ा बदलाव दिखाया है। सरकार ने संकेत दिया है कि अब टैक्सपेयर्स को डर के दायरे में रखने की बजाय भरोसे के ढांचे पर आगे बढ़ा जाएगा। इसी दिशा में इनकम टैक्स कानून को अपराधीकरण से बाहर निकालने का फैसला लिया गया है, ताकि अनुपालन आसान हो और विवाद कम हों।
Income Tax Decriminalization 2026 में जेल की जगह जुर्माना
सबसे अहम बदलाव यह है कि आय छिपाने या गणना में गड़बड़ी पाए जाने पर अब जेल की सजा नहीं होगी। ऐसे मामलों में पेनल्टी के जरिए निपटारा किया जाएगा। यह प्रावधान 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स एक्ट का हिस्सा होगा। उद्देश्य साफ है—कठोरता नहीं, पारदर्शिता।
Income Tax Decriminalization 2026 और विदेशी संपत्ति का खुलासा
जिन करदाताओं के पास विदेशों में अघोषित संपत्ति है, उन्हें एक सीमित अवधि का अवसर दिया गया है। निर्धारित समय में डिस्क्लोजर करने पर मामला नियमित किया जा सकेगा। सरकार मानती है कि स्वैच्छिक खुलासा, लंबी कानूनी प्रक्रिया से बेहतर है।
विदेश यात्रा व पढ़ाई पर राहत
विदेशी टूर पैकेज, शिक्षा और स्वास्थ्य खर्च पर लगने वाला टीसीएस अब एक समान दर पर तय किया गया है। पहले जहां यह 5 से 20 प्रतिशत तक पहुंच जाता था, अब इसे घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे विदेश यात्रा और पढ़ाई की योजना बनाना आसान होगा।
Income Tax Decriminalization 2026 में ITR सुधार का सरल रास्ता
रिटर्न फाइल करते समय होने वाली छोटी-मोटी चूक को अब सुधारना आसान होगा। ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा, वह भी नाममात्र शुल्क के साथ। समयसीमा भी स्पष्ट कर दी गई है—सरल रिटर्न्स के लिए जुलाई और नॉन-ऑडिट मामलों के लिए अगस्त तक।
छोटे करदाताओं को राहत
लोअर या निल टीडीएस सर्टिफिकेट की प्रक्रिया अब पूरी तरह ऑटोमेटेड होगी। इससे छोटे करदाताओं को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और प्रमाणपत्र समय पर मिल सकेंगे।
Income Tax Decriminalization 2026 और NRI प्रॉपर्टी डील
एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदते समय टीडीएस कटौती के लिए अब टैन नंबर लेने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। खरीदार सीधे टीडीएस काट सकेंगे, जिससे रियल एस्टेट लेनदेन में अनावश्यक अड़चनें दूर होंगी।
Income Tax Decriminalization 2026 का कुल असर
कुल मिलाकर, बजट 2026 टैक्स सिस्टम को आसान, डिजिटल और भरोसेमंद बनाने की दिशा में कदम बढ़ाता दिखता है। जेल की सख्ती हटाकर जुर्माने और सुधार के रास्ते खोलना, करदाताओं और सरकार—दोनों के लिए संतुलित समाधान माना जा रहा है।




