सीजी भास्कर, 11 जनवरी। आज जब देश हजारों अरब रुपये के बजट की बात करता है, तब यह जानना दिलचस्प है कि आज़ादी के बाद भारत की पहली आर्थिक तस्वीर कितनी सीमित और चुनौतीपूर्ण (India Budget History) थी। स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश किया गया था, उस दौर में जब देश विभाजन के जख्म, शरणार्थियों की समस्या और आंतरिक अस्थिरता से जूझ रहा था।
इस ऐतिहासिक बजट को तत्कालीन वित्त मंत्री सर आर.के. शनमुखम चेट्टी ने संसद के सामने रखा। यह बजट पूरे साल के लिए नहीं, बल्कि 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक के सीमित समय को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। वजह साफ थी—नया देश, नई व्यवस्था और सीमित संसाधन।
तिजोरी में थे सिर्फ 197 करोड़ रुपये
पहले बजट में सरकार ने कुल 171.15 करोड़ रुपये की आमदनी का अनुमान (India Budget History) लगाया था, जबकि खर्च 197.29 करोड़ रुपये तय किया गया। यानी शुरुआत ही 24.59 करोड़ रुपये के घाटे के साथ हुई। उस समय यह घाटा सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा था, क्योंकि उद्योग, कर व्यवस्था और प्रशासन – सब कुछ पुनर्गठन की प्रक्रिया में था।
आधा बजट सेना के नाम
देश की सुरक्षा उस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। विभाजन के बाद सीमा विवाद, आंतरिक अशांति और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए सरकार ने पहले ही बजट में बड़ा फैसला लिया। कुल खर्च का लगभग आधा हिस्सा यानी 92.74 करोड़ रुपये रक्षा और सेना पर रखा गया। यह फैसला बताता है कि आर्थिक मजबूरियों के बावजूद राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया।
एक मुद्रा, दो देश
पहले बजट के साथ एक और अहम निर्णय जुड़ा (India Budget History) था। भारत और पाकिस्तान के अलग देश बनने के बावजूद यह तय किया गया कि सितंबर 1948 तक दोनों देश एक ही मुद्रा प्रणाली का इस्तेमाल करेंगे। यह व्यवस्था बाद में समाप्त हुई और दोनों देशों ने अपनी-अपनी स्वतंत्र मौद्रिक नीतियां अपनाईं।
आगे बढ़ती आर्थिक यात्रा
इसके बाद 1949-50 का बजट तत्कालीन वित्त मंत्री जॉन मथाई ने पेश किया। यह बजट इसलिए खास माना जाता है क्योंकि इसमें सभी रियासतों को शामिल करते हुए भारत को एक एकीकृत आर्थिक इकाई के रूप में पेश किया गया।
आज जब भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है, तब आज़ादी के बाद पेश किया गया पहला बजट यह याद दिलाता है कि सीमित साधनों, कठिन हालात और भारी जिम्मेदारियों के बीच देश ने अपनी आर्थिक नींव रखी थी।


