मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने रक्षा क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। (India Defense Export) के तहत अब स्वदेशी नेक्स्ट जनरेशन मिसाइल वेसल (NGMV) युद्धपोतों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतारने की तैयारी की जा रही है, जिससे भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।
ब्रह्मोस से लैस होंगे युद्धपोत, बढ़ेगी मारक क्षमता
इन युद्धपोतों की सबसे बड़ी ताकत (BrahMos Missile Power) होगी। हर जहाज में 8 ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तैनात की जाएंगी, जो लंबी दूरी से दुश्मन के जहाजों और ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हैं। इससे इनकी आक्रामक क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
मित्र देशों को निर्यात की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे इन युद्धपोतों को अब उन देशों को बेचने की योजना है, जिन्हें अपनी समुद्री सुरक्षा मजबूत करनी है। (NGMV Warship Plan) के तहत खासतौर पर ऐसे देशों पर फोकस है, जहां समुद्री मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर खतरा बना हुआ है।
छोटा आकार, लेकिन जबरदस्त ताकत
करीब 1,450 टन वजनी ये युद्धपोत आकार में भले छोटे हों, लेकिन इनकी ताकत काफी बड़ी है। इनमें 76 मिमी गन, आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम और क्लोज-इन वेपन सिस्टम लगाए गए हैं। (Warship Features) के चलते ये ड्रोन और मिसाइल हमलों से खुद को सुरक्षित रखते हुए जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम हैं।
रडार से बचकर तेज रफ्तार में ऑपरेशन
इन युद्धपोतों की स्टेल्थ डिजाइन इन्हें रडार और इंफ्रारेड से बचने में मदद करती है। (Stealth & Speed) के तहत ये करीब 35 नॉट्स की स्पीड से चल सकते हैं और लगभग 2,800 नॉटिकल माइल तक का सफर तय कर सकते हैं, जिससे लंबी दूरी के मिशन भी आसानी से पूरे किए जा सकते हैं।
समुद्री सुरक्षा और ऑफशोर संपत्तियों की रक्षा
इनका मुख्य उद्देश्य समुद्र में दुश्मन की गतिविधियों को रोकना और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा सुनिश्चित करना है। (Strategic Role) के तहत ये ऑफशोर ऑयल-गैस प्रोजेक्ट्स और महत्वपूर्ण समुद्री संसाधनों की रक्षा में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
छोटे और घातक युद्धपोतों की बढ़ती मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात में कई देश छोटे, तेज और घातक युद्धपोतों की तलाश में हैं। (Global Demand) के चलते भारत का यह कदम रक्षा निर्यात को बढ़ावा देने के साथ उसे एक भरोसेमंद वैश्विक सप्लायर के रूप में स्थापित कर सकता है।


