India Economic Inequality : देश में अमीरी और गरीबी के बीच की दूरी लगातार बढ़ती जा रही है। नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत उन देशों की सूची में सबसे ऊपर पहुंच चुका है, जहाँ आर्थिक असमानता (Economic Gap) बेहद गहराई से दिखाई देती है। आंकड़ों के अनुसार, शीर्ष 10% लोगों के पास राष्ट्रीय आय का बड़ा हिस्सा ही नहीं, बल्कि कुल संपत्ति का करीब 65% हिस्सा भी जमा है।
टॉप 1% की बढ़ती पकड़ चौंकाती है
इसी रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भारत की शीर्ष 1% आबादी ने राष्ट्रीय आय का लगभग 22.6% अपने नियंत्रण में ले लिया है—जो 1920 के दशक के बाद का सबसे बड़ा स्तर है। संपत्ति के मामले में भी स्थिति अलग नहीं है; देश की कुल वेल्थ का 40% से ज़्यादा हिस्सा इसी समूह के पास पाया गया।
उदारीकरण के बाद तेज हुई आर्थिक असमानता
अर्थशास्त्रियों की टीम द्वारा तैयार इस अध्ययन में कहा गया है कि उदारीकरण के बाद से यह खाई और गहरी होती चली गई। रिपोर्ट बताती है कि प्रति व्यक्ति औसत वार्षिक आय लगभग 6,200 यूरो (PPP) है, जबकि औसत संपत्ति 28,000 यूरो (PPP) दर्ज की गई है—पर इन औसतों के पीछे मौजूद भारी अंतर तस्वीर को और स्पष्ट करता है।
महिलाओं की श्रम भागीदारी में सुधार नहीं
रिपोर्ट का महत्वपूर्ण बिंदु महिलाओं की स्थिति को लेकर है। देश में महिला श्रम भागीदारी 15.7% पर ही अटकी हुई है। पिछले एक दशक में इसमें कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जेंडर आधारित असमानता भी उसी आर्थिक ढांचे का हिस्सा बन चुकी है।
बढ़ती खाई कम करने के लिए टैक्स सुधार का सुझाव
रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पर 2% वार्षिक वेल्थ टैक्स, और इसी सीमा से ऊपर विरासत पर 33% इनहेरिटेंस टैक्स लगाया जाए। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में फंडिंग बेहतर हो सकती है, जो निचले तबके को सीधे लाभ पहुंचाएगी।
सिस्टम में गहराई तक जमा असमानता
अध्ययन इस नतीजे पर पहुँचता है कि भारत में मौजूद आर्थिक विषमता सिर्फ आय या धन तक सीमित नहीं है। यह सामाजिक, लैंगिक और संरचनात्मक स्तरों पर भी गहराई से जमी हुई है। इन असमानताओं को कम करने के लिए नीतिगत और दीर्घकालिक कदमों की ज़रूरत पर जोर दिया गया है।





