सीजी भास्कर, 12 दिसंबर। हाल ही में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारत और अमेरिका के बीच संबंधों (India US Relations) को लेकर चर्चा हुई। इस दौरान अमेरिका के प्रतिनिध सभा के सदस्य बिल हुइजेंगा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को विदेश नीति को लेकर रुख साफ किया है। उन्होंने कहा है कि अगर अमेरिका को हिंद प्रशांत क्षेत्र और सही तरीके से आपूर्ति चेन चाहिए तो उसे भारत की पहले से ज्यादा जरूरत है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर चर्चा
भारत-अमेरिका संबंधों पर सुनवाई के दौरान हुइजेंगा ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध (India US Relations) अब केवल महत्वपूर्ण नहीं रह गए हैं। बल्कि 21वीं सदी के निर्णायक संबंध बन चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर अमेरिका एक स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र चाहता है, एक ऐसी दुनिया में लचीली आपूर्ति श्रृंखलाएं चाहता है तो भारत के साथ हमारी डील महत्वपूर्ण है।
हुइजेंगा ने कहा कि भले ही भारत की स्वतंत्रता के बाद साझेदारी में सूक्ष्म बदलाव आए हैं और भारत की गुटनिरपेक्षता की नीति ने इसकी रणनीतिक पहचान को आकार दिया है, फिर भी अमेरिका और भारत लोकतांत्रिक मूल्यों और स्वतंत्रता की गहरी इच्छा पर आधारित एक स्वतंत्र, खुल और सुरक्षित हिंद प्रशांत एरिया की साझा नजरिया रखते हैं।
अमेरिकी सांसद ने कहा कि अमेरिका में चाहे रिपब्लिकन का प्रशासन हो या फिर डेमोक्रेटिक, दोनों ने भारत के साथ संबंधों को सशक्त बनाने या कम से कम ऐसा करने का प्रयाक किया है। यह स्पष्ट करते हुए कि संयुक्त राज्य अमेरिका भारत को एक अस्थायी या लेन-देन वाला साझेदार नहीं मानता है।
न केवल इतना बल्कि हुइजेंगा ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के टैरिफ की वजह से भारत-अमेरिक के संबंधों में खटास आई है। ट्रंप प्रशासन ने भारत के उत्पादकों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया। इस टैरिफ में 25 फीसदी भारत द्वारा रूस से आयात किए जाने वाल तेल पर लागू होता है। अमेरिका यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए भारत पर रूस से तेल का आयात कम करने का दबाव डाल हा है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि भातर और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम के बाद भारत की ओर से ट्रंप को कोई क्रेडिट नहीं दिए जाने के कारण ट्रंप नाराज थे।
भारत में पुतिन की यात्रा को लेकर हुई चर्चा
अमेरिकी सांसद (India US Relations) ने यह भी कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा और इस सितंबर में चीन के शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में भारत की भागीदारी ने ‘कुछ स्वाभाविक चिंताएं पैदा’ की हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत ने अधिक अमेरिकी एनर्जी खरीदने पर सहमति जताई है, जिससे रूस पर उसकी निर्भरता कम हो सकेगी।
हुइजेंगा ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की गतिविधियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चीन और रूस बलपूर्वक सीमाओं का विस्तार कर रहे हैं, लोकतांत्रिक मानदंडों को कमजोर कर रहे हैं और अपने पड़ोसियों पर दबाव डाल रहे हैं. हिंद-प्रशांत क्षेत्र में यह सबसे अधिक स्पष्ट है, जहां तेजी से आक्रामक होता चीन क्षेत्रीय स्थिरता, वैश्विक समृद्धि और व्यापार के फ्लो के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चीन की ‘मोतियों की माला’ वाली विचारधारा अब एक सिद्धांत नहीं रह गई है, बल्कि यह हिंद महासागर, उसके समुद्री मार्गों को घेरने, नियंत्रित करने और इन रणनीतिक बंदरगाहों और व्यापार मार्गों के सैन्यीकरण का विस्तार करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि हम ऐसा नहीं होने दे सकते हैं। भारत इस खतरे को समझ रहा है।


