सीजी भास्कर, 22 दिसंबर। 26 दिसंबर से रेल यात्रा करने वाले यात्रियों को जेब ढीली करनी होगी। भारतीय रेलवे ने लंबी दूरी की यात्रा पर किराया बढ़ाने का फैसला किया है। नए नियमों के तहत 215 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करने पर यात्री अब अधिक किराया चुकाएंगे। रेलवे के अनुसार यह किराया वृद्धि (Indian Rail Fare Hike 2025) अगले साल 31 मार्च तक करीब 600 करोड़ रुपये अतिरिक्त आमदनी पैदा करेगी, जिससे रेलवे नेटवर्क के विस्तार और सुरक्षा प्रबंधन में मदद मिलेगी।
रेलवे द्वारा जारी जानकारी के अनुसार साधारण श्रेणी में 215 किलोमीटर से अधिक की यात्रा पर किराया एक पैसा प्रति किलोमीटर बढ़ाया गया है, जबकि मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों की नान-एसी और एसी श्रेणियों में दो पैसे प्रति किलोमीटर अतिरिक्त किराया देना होगा (Indian Rail Fare Hike 2025)। उदाहरण के तौर पर यदि कोई यात्री दिल्ली से पटना साधारण श्रेणी में यात्रा करता है, तो उसे लगभग 10 रुपये अधिक चुकाने होंगे, जबकि आरक्षित श्रेणी में यह बढ़ोतरी 20 रुपये तक पहुंचेगी।
रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह किराया वृद्धि उपनगरीय ट्रेनों और मासिक सीजन टिकटों पर लागू नहीं होगी। यानी मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और दिल्ली जैसे महानगरों में स्थानीय ट्रेनों के यात्रियों को किसी अतिरिक्त किराये का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। वहीं नान एसी कोच में 500 किलोमीटर की यात्रा पर 10 रुपये और मेल/एक्सप्रेस एसी ट्रेन से दिल्ली-मुंबई के बीच लगभग 1,384 किलोमीटर की दूरी पर करीब 27.68 रुपये अतिरिक्त देने होंगे (Indian Rail Fare Hike 2025)।
एक साल में यह दूसरी बार है जब यात्री किराये में बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले इसी वर्ष एक जुलाई को किराया बढ़ाया गया था, जब स्लीपर और फर्स्ट क्लास श्रेणी में प्रति किलोमीटर आधा पैसा बढ़ाया गया था। उस संशोधन से अब तक रेलवे को 700 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। रेलवे मंत्रालय का कहना है कि पिछले एक दशक में नेटवर्क विस्तार, नई ट्रेनों, नई लाइनों और सुरक्षा ढांचे पर भारी निवेश हुआ है। इसके साथ ही कर्मचारियों की संख्या बढ़ने और पेंशन भार में इजाफा होने से खर्च भी बढ़ा है, जिसे संतुलित करने के लिए यह किराया संशोधन (Indian Rail Fare Hike 2025) आवश्यक था।
रेल मंत्रालय के अनुसार भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा माल ढुलाई नेटवर्क है और त्योहारों के दौरान 12,000 से अधिक ट्रेनों का सफल संचालन किया जा रहा है। ऐसे में संचालन लागत और सामाजिक दायित्वों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि यह फैसला लंबे रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों की जेब पर असर डालेगा, लेकिन रेलवे इसे विकास, सुरक्षा और प्रबंधन सुधार का अहम हिस्सा मानता है।





