सीजी भास्कर, 12 दिसंबर। इंडिगो एयरलाइंस (IndiGo Airlines) के ऑपरेशन को लेकर बवाल जारी है। इस मामले को लेकर शुक्रवार को महानिदेशालय नागिरक उड्डयन डीजीसीए ने प्रारंभिक जांच में बड़ी कार्रवाई की। इस जांच के दौरान कुछ इंस्पेक्टर को दोषी पाए जाने के बाद डीजीसीए ने इंडिगो की निगरानी करने वाले अपने 4 फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टरों को नौकरी से निष्कासित कर दिया है।
डीजीसीए ने 4 इंस्पेक्टर को किया सस्पेंड
दरअसल, ये सभी इंस्पेक्टर इंडिगो (IndiGo Airlines) की उड़ानों की सुरक्षा और संचालन की जांच से जुड़े थे। माना जा रहा है कि डीजीसीए को यह सख्त कदम जांच और निगरानी में हुई लापरवाही के चलते लेना पड़ा है। जिसके तहत अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है, वे सभी कॉन्ट्रैक्ट पर DGCA में काम कर रहे थे और इनकी जिम्मेदारी एयरलाइंस खासतौर पर इंडिगो के सुरक्षा एवं ऑपरेशनल ओवरसाइट (Operational Oversight) की थी।
बता दें, इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और डीजीसीए ने फ्लाइट संचालन में रुकावट और एयरपोर्ट पर यात्रियों की दिक्कतों से संबंधित सख्त सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि ऐसी अचानक स्थिति पैदा ही क्यों हुई और यात्रियों की मदद के लिए क्या कदम उठाए गए? कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि एयरपोर्ट पर फंसे यात्रियों को संभालने और उनकी परेशानी रोकने के लिए सरकार ने क्या इंतज़ाम किए।
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ़ यात्रियों की परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक नुकसान और सिस्टम की नाकामी भी शामिल है। अदालत ने पूछा कि यात्रियों को मुआवजा देने के लिए क्या कार्रवाई की गई और एयरलाइन स्टाफ की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए?
हाई कोर्ट ने एयर टिकटों में भारी बढ़ोतरी पर भी गंभीर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि जो टिकट पहले ₹5,000 में मिलते थे, वे बढ़कर ₹30,000–35,000 कैसे पहुंच गए? बेंच ने पूछा कि संकट के समय दूसरी एयरलाइंस को इतना लाभ उठाने की अनुमति कैसे मिल गई? इतना ऊंचा किराया चार्ज करना कैसे संभव है?
इसके जवाब में ASG चेतन शर्मा ने बताया कि पूरा कानूनी सिस्टम लागू है और केंद्र लंबे समय से FDTL को लागू करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन एयरलाइन ने जुलाई और नवंबर के फेज के लिए राहत मांगी थी। उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब मंत्रालय ने दखल देकर किराए की लिमिट तय की है, जो अपने आप में सख्त नियामकीय कदम है।




