Inhuman Treatment of Widow: छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत और सामाजिक सोच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रेम प्रसंग के शक में एक विधवा महिला को न केवल सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया, बल्कि उसके साथ अमानवीय व्यवहार की सारी हदें पार कर दी गईं।
गांव के बीच महिला को बनाया गया प्रताड़ना का निशाना
घटना खोडरी चौकी अंतर्गत ग्राम रानीझाप की बताई जा रही है। आरोप है कि महिला को साड़ी उतारकर अर्धनग्न अवस्था में पूरे गांव में घुमाया गया। इस दौरान जूते-चप्पलों से उसकी पिटाई की गई और चेहरे पर गोबर पोतकर उसे अपमानित किया गया। गांव के मुख्य मार्ग से लेकर काली मंदिर तक महिला को घसीटते हुए ले जाया गया।
प्रेम संबंध बना हिंसा की वजह
स्थानीय जानकारी के अनुसार, पीड़ित महिला का एक शादीशुदा युवक से संबंध था। दोनों कुछ समय पहले गांव छोड़कर मध्य प्रदेश चले गए थे। वापस लौटने पर युवक की पत्नी और परिजनों ने आपत्ति जताई। पुलिस में समझौते के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन सामाजिक गुस्सा अगले दिन हिंसा में बदल गया।
समझौते के बाद भी टूटा कानून का डर
बताया जा रहा है कि समझौते के अगले ही दिन सुबह कुछ लोग एकजुट हुए और महिला को घर से बाहर खींचकर मारपीट शुरू कर दी। खुलेआम गालियां दी गईं, बाल पकड़कर सड़क पर घसीटा गया और भीड़ तमाशबीन बनी रही। इस दौरान कुछ लोगों ने घटना का वीडियो भी बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर फैल गया।
ग्रामीणों की दखल से बची जान
हंगामा बढ़ता देख कुछ ग्रामीणों और महिला के परिजन मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसी तरह महिला को भीड़ से छुड़ाया, कपड़े पहनाए और पुलिस को सूचना दी। गंभीर हालत में महिला को इलाज के लिए ले जाया गया।
पुलिस कार्रवाई और जांच जारी
पुलिस ने इस मामले में युवक की पत्नी, भाई और बहन के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। प्राथमिक कार्रवाई के बाद आरोपियों को जमानत पर छोड़ा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और मामले की गहन जांच की जा रही है।
समाज के लिए चेतावनी
यह घटना सिर्फ एक महिला के साथ हुई हिंसा नहीं है, बल्कि उस सोच का आईना है, जहां आज भी महिलाओं को सज़ा देने का अधिकार समाज खुद को दे बैठता है। कानून के रहते ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह हैं।




