अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री International Women’s Day कार्यक्रम के तहत महिला पत्रकारों से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ महिलाओं की भूमिका पर खुलकर बात की, बल्कि अपने जीवन से जुड़े कई व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने की राह आसान नहीं थी, लेकिन परिवार, खासकर मां का साथ उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा।
कम उम्र में पिता का साया उठा, मां ने संभाली जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री ने बातचीत के दौरान बताया कि बचपन में ही उनके पिता का निधन हो गया था। उस समय परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां ने संभाली। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई और परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी। मुख्यमंत्री के अनुसार, उनकी मां का संघर्ष और हिम्मत ही उनके जीवन की असली प्रेरणा रही है। यही वजह है कि वे हमेशा महिलाओं की ताकत और उनके योगदान को विशेष महत्व देते हैं। इस तरह की सोच को आज Women Empowerment की दिशा में एक मजबूत उदाहरण माना जाता है।
राजनीति में व्यस्तता, घर की जिम्मेदारी पत्नी ने संभाली
मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे 26 साल की उम्र में विधायक बने, तब जिम्मेदारियां अचानक बढ़ गईं। उस समय उनकी पत्नी ने घर और बच्चों की पूरी जिम्मेदारी संभाली। इससे उन्हें सार्वजनिक जीवन और राजनीति में पूरी तरह ध्यान देने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की सफलता के पीछे परिवार का सहयोग बहुत अहम होता है, और उनके जीवन में यह भूमिका महिलाओं ने निभाई है।
परिवार में फैसले मिलकर लेने की परंपरा
उन्होंने यह भी बताया कि उनके घर में बड़े फैसले हमेशा आपसी चर्चा के बाद ही लिए जाते हैं। परिवार की महिलाओं की राय को भी बराबर महत्व दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यही पारिवारिक संस्कार उन्हें समाज में महिलाओं के अधिकार और सम्मान के लिए काम करने की प्रेरणा देते हैं। इसे सामाजिक स्तर पर Gender Equality की सोच से भी जोड़ा जा सकता है।
महिलाओं की आर्थिक मजबूती पर सरकार का फोकस
महिला सशक्तिकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले महिलाएं अधिकतर घरेलू दायरे तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। स्व-सहायता समूहों और विभिन्न सरकारी योजनाओं की मदद से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में करीब 8 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 10 लाख तक पहुंचाने का है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में Self Help Groups के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
बस्तर जैसे क्षेत्रों में भी बदले हालात
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी अब तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से लोगों के जीवन में बदलाव आ रहा है। खासकर महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर बन रहे हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।
व्यस्तता के बीच परिवार की छोटी यादें
बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने हल्के अंदाज में एक दिलचस्प बात भी साझा की। उन्होंने बताया कि पहले वे घर के सभी सदस्यों के कपड़े खुद खरीदते थे, लेकिन अब व्यस्तता इतनी बढ़ गई है कि पिछले कई वर्षों से उनके ज्यादातर कपड़े उनकी पत्नी ही खरीदती हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि परिवार की महिलाओं का सहयोग ही उनके जीवन को संतुलित बनाए रखता है।





