सीजी भास्कर, 22 दिसंबर। वन विभाग को वन्यजीव संरक्षण के मोर्चे पर बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता मिली है। अंतर्राज्यीय स्तर पर सक्रिय पेंगोलिन तस्कर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक जीवित पेंगोलिन (सालखपरी) बरामद किया गया है। यह कार्रवाई वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई, जिससे अवैध शिकार और तस्करी के नेटवर्क को करारा झटका लगा है। यह मामला अंतर्राज्यीय पेंगोलिन तस्करी (Interstate Pangolin Smuggling) से जुड़ा हुआ है।
यह संयुक्त कार्रवाई वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण पांडेय, मुख्य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व सतोविशा समाजदार तथा उपनिदेशक वरुण जैन के मार्गदर्शन में अंजाम दी गई। वाइल्ड लाइफ जस्टिस कमीशन इंडिया से प्राप्त सटीक सूचना के आधार पर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग टीम और ओडिशा के नवरंगपुर वनमंडल की संयुक्त टीम ने सुनियोजित अभियान चलाया।
जानकारी के अनुसार, 7 दिसंबर को उमरकोट के समीप ढोर्रा और सिमलीगोदरा के बीच संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर घेराबंदी की गई। इस दौरान दो व्यक्तियों को पकड़कर तलाशी ली गई, जिनके कब्जे से एक जीवित पेंगोलिन बरामद हुआ। बरामद सालखपरी की लंबाई लगभग 40 इंच और वजन करीब 9 किलोग्राम पाया गया, जिसे सुरक्षित अभिरक्षा में लिया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गोपाल (42 वर्ष), निवासी सिमलीगोदरा, और मनोज (30 वर्ष), निवासी मलकीगुड़ा, जिला नवरंगपुर (ओडिशा) के रूप में हुई है। ओडिशा वन विभाग द्वारा पेंगोलिन के साथ तस्करी में प्रयुक्त एक मोटरसाइकिल (स्कूटी) भी जब्त कर जप्तीनामा तैयार किया गया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत वन अपराध दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
आरोपियों को उमरकोट न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। वन विभाग अब इस गिरोह से जुड़े अन्य तस्करों और नेटवर्क की गहन जांच कर रहा है। इस कार्रवाई में गरियाबंद पुलिस साइबर सेल, एंटी-पोचिंग टीम, वाइल्ड लाइफ जस्टिस कमीशन इंडिया और नवरंगपुर वनमंडल के स्टाफ की अहम भूमिका रही है।





