सीजी भास्कर, 3 मार्च। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष और गहराता (Iran Dubai Attack) जा रहा है। ईरान की ओर से लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में दुबई के पास स्थित अल मिन्हाद एयर बेस को निशाना बनाया गया, जहां ऑस्ट्रेलियाई सैन्य उपस्थिति है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसके “ऑपरेशन ट्रुथफुल प्रॉमिस 4” के तहत खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनसे जुड़े एसेट्स को टारगेट किया जा रहा है। यह कार्रवाई 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में बताई जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री Richard Marles ने पुष्टि की कि यूएई के Al Minhad Air Base पर हमला हुआ है। उन्होंने कहा कि वहां तैनात सभी ऑस्ट्रेलियाई सैनिक सुरक्षित हैं और उनकी लोकेशन ट्रैक कर ली गई है। ऑस्ट्रेलिया के अनुसार मिडिल ईस्ट में उसके 100 से अधिक सैन्यकर्मी तैनात हैं, जिनमें अधिकांश संयुक्त अरब अमीरात में हैं।
खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकाने निशाने पर
ईरान ने दुबई के अलावा कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमले (Iran Dubai Attack) किए हैं। जानकारी के मुताबिक मिडिल ईस्ट में अमेरिका के करीब 13 प्रमुख सैन्य बेस हैं, जहां 30,000 से 40,000 तक सैनिक तैनात रहते हैं।
ईरान का कहना है कि उसके हमलों का मुख्य निशाना अमेरिकी सैन्य एसेट्स हैं। हालांकि इन हमलों से खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि कई ठिकानों पर पश्चिमी देशों के सैनिक मौजूद हैं।
दुबई में बढ़ी सतर्कता
दुबई लंबे समय से क्षेत्र में अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर कारोबारी केंद्र (Iran Dubai Attack) माना जाता रहा है। यहां बड़ी संख्या में विदेशी निवेशक, कारोबारी और प्रवासी समुदाय रहते हैं। लेकिन हालिया हमलों के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और रणनीतिक स्थलों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल क्षेत्र में तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है।





