सीजी भास्कर, 14 मार्च। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत देने वाली खबर (Iran India LPG Tanker) सामने आई है। ईरान ने भारत की ओर बढ़ रहे दो एलपीजी जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है। इस फैसले को सिर्फ दो जहाजों की आवाजाही भर नहीं, बल्कि खाड़ी में रुके भारतीय पोतों के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। बीते कुछ दिनों से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास भारतीय जहाजों की आवाजाही प्रभावित थी, जिससे ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब ईरान की मंजूरी के बाद यह उम्मीद मजबूत हुई है कि फंसे अन्य जहाजों के लिए भी रास्ता धीरे-धीरे खुल सकता है।
दो जहाजों को रास्ता, बाकी पोतों पर भी टिकी नजर
उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिन दो भारतीय एलपीजी जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति मिली है, वे भारत के लिए अहम ईंधन लेकर आ रहे हैं। एक जहाज पहले ही आगे बढ़ चुका है, जबकि दूसरा भी उसके बाद मार्ग पर चलने (Iran India LPG Tanker) वाला है। इस पूरे घटनाक्रम का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि होर्मुज क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले कई जहाज अब भी अटके हुए बताए जा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 24 भारतीय पोत अब भी इस समुद्री मार्ग के पश्चिमी हिस्से के आसपास फंसे हुए हैं। इसलिए दो जहाजों को मिली छूट को भारत के लिए सीमित लेकिन महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।
भारत की चिंता सिर्फ जहाज नहीं, घरेलू ऊर्जा आपूर्ति भी
यह मामला केवल समुद्री आवागमन का नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा से भी सीधे जुड़ा है। भारत अपने एलपीजी आयात का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से हासिल करता है, और होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरी सप्लाई चेन का बेहद अहम रास्ता है। ऐसे में जहाजों की आवाजाही रुकने का असर घरेलू गैस उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और कीमतों पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि नई दिल्ली ने इस मुद्दे पर कूटनीतिक स्तर पर तेजी दिखाई। हाल की उच्चस्तरीय बातचीत के बाद जहाजों को मंजूरी मिलना इस बात का संकेत है कि भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर गंभीर पहल की है।
जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद नहीं, लेकिन निगरानी कड़ी
हालात अब भी पूरी तरह सामान्य नहीं कहे जा सकते। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर सख्त नजर रखी जा रही है और आवाजाही नियंत्रित तरीके (Iran India LPG Tanker) से हो रही है। इसका मतलब यह है कि समुद्री मार्ग खुला जरूर है, लेकिन सामान्य कारोबारी ढर्रे पर नहीं लौटा है। इसलिए भारतीय जहाजों को मिली यह मंजूरी राहत भरी जरूर है, लेकिन संकट पूरी तरह टला नहीं माना जा सकता। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्या अन्य भारतीय जहाजों को भी इसी तरह चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित रास्ता मिलता है।
कच्चे तेल के दाम फिर चढ़े, बाजार में बनी हुई है बेचैनी
होर्मुज के आसपास तनाव और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी साफ दिख रहा है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 103.14 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि बाजार में यह आशंका बनी हुई है कि अगर समुद्री मार्ग पर बाधा लंबे समय तक जारी रही तो कीमतों पर और दबाव बन सकता है। यही वजह है कि दो जहाजों को मिली अनुमति के बावजूद तेल बाजार इसे पूरी राहत नहीं मान रहा। अभी भी सप्लाई रिस्क, युद्ध का असर और समुद्री सुरक्षा को लेकर निवेशकों की चिंता बनी हुई है।





