सीजी भास्कर, 9 जनवरी। ईरान में महंगाई के खिलाफ जंग अब भीषण जनआंदोलन में बदल चुकी है। देश के सौ से अधिक शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं और हालात लगातार बेकाबू होते जा रहे हैं। 13 दिनों से जारी इस आंदोलन में अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। हिंसक झड़पों के दौरान एक पुलिसकर्मी की तेज धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। गुरुवार को प्रदर्शन के दौरान हालात और ज्यादा खराब हो गए, जब गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने कई इलाकों में आगजनी कर वाहनों को फूंक दिया। आगजनी और हिंसा की इन घटनाओं से पूरा ईरान दहल उठा है और महंगाई के खिलाफ चल रहा यह आंदोलन (Iran Inflation Protest) अब शासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
प्रदर्शनकारियों ने कई शहरों में प्रमुख सड़कों को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है, जिससे सामान्य जनजीवन ठप हो गया है। क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के समर्थन में सड़कों पर उतरे लोगों ने “खामेनेई को मौत” और “इस्लामिक रिपब्लिक का अंत हुआ, आखिरी लड़ाई है, शाह पहलवी लौटेंगे” जैसे नारे लगाए। हिंसक प्रदर्शन के चलते सड़क परिवहन के साथ-साथ रेल और हवाई सेवाएं भी बाधित कर दी गई हैं। देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गई हैं, जबकि तेहरान का प्रमुख बाजार और एयरपोर्ट पूरी तरह बंद है। अमेरिकी ह्यूमन राइट एजेंसी के अनुसार पुलिस ने अब तक 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है और सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इन हालातों में महंगाई के खिलाफ चल रहा आंदोलन (Iran Inflation Protest) और ज्यादा उग्र होता जा रहा है।
देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप होने से आम लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग टूट गया है। इंटरनेट वॉचडॉग नेटब्लॉक्स ने इसे हिंसक दमन की तैयारी बताया है। इसके बावजूद कुछ लोग इलॉन मस्क की सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा स्टारलिंक के जरिए वीडियो और संदेश पोस्ट कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि स्टारलिंक सैटेलाइट के माध्यम से संचालित होती है, जिससे सरकारी प्रतिबंधों को आंशिक रूप से तोड़ा जा रहा है। इससे यह साफ होता है कि महंगाई के खिलाफ उठी यह आवाज (Iran Inflation Protest) केवल सड़कों तक सीमित नहीं रह गई है।
लोग अब सीधे ईरानी शासन को खुली चुनौती दे रहे हैं। कई शहरों में छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपसों पर कब्जा कर लिया है और सरकार विरोधी नारे लगातार तेज हो रहे हैं। आर्थिक बदहाली की वजह से खासतौर पर जेन जेड युवाओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। बीते साल के आखिरी महीने यानी दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई थी, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। साल की शुरुआत से रियाल की वैल्यू लगभग आधी हो चुकी है। इसके चलते महंगाई अपने शीर्ष स्तर पर पहुंच गई है और खाद्य वस्तुओं के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं। यही आर्थिक संकट इस आंदोलन (Iran Inflation Protest) की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है।
स्थिति तब और विस्फोटक हो गई, जब सरकार ने 2026 के बजट में 62 प्रतिशत टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। इस फैसले ने आम जनता में पहले से मौजूद नाराजगी को आक्रोश में बदल दिया। इसी बीच निर्वासित युवराज रजा पहलवी ने लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की, जिसके बाद प्रदर्शन और तेज हो गए। रजा पहलवी ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं, जिन्हें 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान सत्ता से हटाया गया था। युवराज पहलवी फिलहाल अमेरिका में निवासरत हैं और लगातार महंगाई के खिलाफ आंदोलन (Iran Inflation Protest) को समर्थन दे रहे हैं।
रजा पहलवी ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि आजाद दुनिया के लीडर के तौर पर सरकारों को जवाबदेह ठहराना जरूरी है। उन्होंने अन्य देशों से भी अपनी चुप्पी तोड़कर ईरानी जनता के समर्थन में सामने आने की अपील की है। दूसरी ओर ट्रंप ने ईरानी शासन को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों को मारा गया तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा। इन बयानों से हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं।
कुल मिलाकर, महंगाई, टैक्स बढ़ोतरी और आर्थिक बदहाली ने ईरान को उबाल के कगार पर ला खड़ा किया है। जनता खुलकर शासन के खिलाफ खड़ी है और यह आंदोलन आने वाले दिनों में किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।





