मध्य पूर्व में चल रहा Iran Israel Conflict एक बार फिर चर्चा में है। हाल के घटनाक्रम में ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र की दिशा में ड्रोन और मिसाइल गतिविधियां दर्ज की गई हैं, जिन्हें कई देशों की वायु रक्षा प्रणालियों ने समय रहते रोक दिया। सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात की सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया कि कई संभावित हमलों को इंटरसेप्ट किया गया, जिससे बड़े नुकसान की आशंका टल गई।
ईरान ने पहले जताई थी खेद की भावना
कुछ दिन पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पड़ोसी देशों के संदर्भ में बयान देते हुए कहा था कि ईरान का उद्देश्य खाड़ी देशों को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनकी कार्रवाई उन स्थानों के खिलाफ है, जहां विदेशी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। यह बयान उस समय आया था जब क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने की कोशिशें जारी थीं। विशेषज्ञ इसे Middle East Tension के बीच कूटनीतिक संदेश के रूप में भी देख रहे हैं।
इजराइल के हमलों के बाद बदला घटनाक्रम
हालांकि हालात उस समय फिर बदल गए जब शनिवार रात इजराइल की ओर से ईरान के कुछ ठिकानों पर हमले किए गए। रिपोर्टों के अनुसार तेहरान के एक ऑयल डिपो को भी निशाना बनाया गया, जिससे इलाके में भारी नुकसान की खबर सामने आई। इस घटना के बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई तेज हो गई और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ने लगीं।
जवाबी कार्रवाई में हाइफा रिफाइनरी को बनाया निशाना
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े अधिकारियों ने दावा किया कि तेल भंडार पर हुए हमले के जवाब में इजराइल के हाइफा स्थित ऑयल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। हालांकि इस घटना को लेकर अलग-अलग पक्षों से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। क्षेत्रीय विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई Drone Missile Attack रणनीति का हिस्सा बनती जा रही है।
ट्रंप का बयान, कूटनीतिक बहस तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान का माफी मांगना उनकी रणनीति की जीत को दर्शाता है। ट्रंप ने दावा किया कि लगातार दबाव के कारण ईरान को अपने पड़ोसियों के प्रति नरम रुख अपनाना पड़ा। हालांकि इस बयान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
विशेषज्ञों ने जताई बड़े संघर्ष की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हमले और जवाबी कार्रवाई इसी तरह जारी रहती है, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है। इस क्षेत्र में पहले से ही कई देश सैन्य और रणनीतिक रूप से संवेदनशील स्थिति में हैं। ऐसे में किसी भी नए घटनाक्रम का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। यही कारण है कि दुनिया की कई ताकतें इस Gulf Region Crisis पर नजर बनाए हुए हैं।





