सीजी भास्कर, 25 मार्च। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड ने एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक हलकों में हलचल (Jaggi Murder Case Chhattisgarh) बढ़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस मामले को दोबारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में खोला गया है, जहां बुधवार को इसकी सुनवाई हुई। अब इस केस की अंतिम सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की गई है।
बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई की, जिसमें जग्गी के बेटे सतीश जग्गी की ओर से पक्ष रखा गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई में CBI, राज्य सरकार और अमित जोगी सभी पक्ष अपने-अपने तर्क पेश करेंगे।
इस बीच अमित जोगी ने इस मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया (Jaggi Murder Case Chhattisgarh) दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि “सत्य की जीत होगी” और वे न्याय प्रक्रिया पर भरोसा रखते हैं। उन्होंने लोगों से समर्थन और प्रार्थना की अपील भी की।
क्यों फिर खुला मामला?
दरअसल, इससे पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस केस में दोषियों की सजा को बरकरार रखा था और अपील खारिज कर दी थी। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामले को फिर से हाईकोर्ट भेज दिया, ताकि इसकी मेरिट पर विस्तृत सुनवाई हो सके।
क्या है पूरा हत्याकांड?
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब NCP नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस केस में कुल 31 आरोपियों को शामिल किया गया था, जिनमें से कई को दोषी ठहराया गया, जबकि कुछ सरकारी गवाह बन गए।
अमित जोगी को 2007 में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। इसके खिलाफ जग्गी के परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिसके बाद यह मामला फिर से कानूनी प्रक्रिया में आया।
CBI जांच और विवाद
शुरुआती जांच में पक्षपात के आरोप लगने के बाद मामला CBI को सौंपा (Jaggi Murder Case Chhattisgarh) गया था। जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कई लोगों के खिलाफ साजिश और हत्या के आरोप लगाए थे। इस केस में अब तक कई दोषियों को सजा मिल चुकी है।
जग्गी के बेटे सतीश जग्गी का आरोप है कि यह हत्या एक बड़े राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा थी और सबूतों को प्रभावित किया गया। उनके वकील ने अदालत में इसी आधार पर दोबारा सुनवाई की मांग की है।
अब क्या होगा आगे?
1 अप्रैल को होने वाली अंतिम सुनवाई इस मामले में बेहद अहम मानी (Jaggi Murder Case Chhattisgarh) जा रही है। इसी दिन कोर्ट तय करेगा कि पूर्व में दिए गए फैसले में कोई बदलाव होगा या नहीं। करीब दो दशक पुराने इस हाई-प्रोफाइल केस पर एक बार फिर सबकी नजरें टिक गई हैं। यह मामला न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया, बल्कि राजनीतिक इतिहास का भी अहम हिस्सा बन चुका है।


