सीजी भास्कर, 9 दिसंबर। जल जीवन मिशन की मल्टी-विलेज स्कीम में बड़ा घपला (Jal Jeevan Mission Scam) सामने आया है। जहां DPR में स्पष्ट रूप से DI-K7 (डक्टाइल आयरन) पाइप लगाने का प्रावधान था, वहीं बिना अनुमति डिजाइन बदलकर O-PVC पाइप लगा दिए गए। यह बदलाव न सिर्फ तकनीकी मानकों के खिलाफ माना जा रहा है बल्कि अनुमान है कि स्कीम में इससे तीन करोड़ से अधिक की लागत हानि हुई।
दस्तावेजों के अनुसार, यह बदलाव डीपीआर संशोधन की नियमानुसार प्रक्रिया अपनाए बिना किया गया। तत्कालीन मिशन संचालक डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने 23 अक्टूबर 2024 को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव को पत्र लिखकर यह अनियमितता दर्ज की थी। रिपोर्ट में कहा गया कि डिजाइन में किए गए बदलाव के लिए आवश्यक स्वीकृति व पुनरीक्षित प्रशासनिक मंजूरी नहीं ली गई।
पाइप स्वीकृत और टेंडर जारी
जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission Scam) में निर्धारित मेन लाइन DI-K7 पाइप से बननी थी — यह पाइप मजबूत, टिकाऊ और पहाड़ी इलाकों के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है। लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि मुख्य अभियंता स्तर पर DPR संशोधित किए बिना ही 250mm से कम व्यास वाली O-PVC पाइप को डिजाइन में शामिल कर दिया गया और PAC तकनीकी स्वीकृति भी जारी कर दी गई। इसके बाद बदले हुए पाइपों को आधार बनाकर टेंडर जारी कर दिए गए।
अभियंता पर कार्रवाई की अनुशंसा, फाइल एक वर्ष से रुकी
प्रमुख अभियंता T.D. शांडिल्य ने 29 अप्रैल 2025 और 18 जुलाई 2025 को विभागीय सचिव को पत्र भेजकर मुख्य अभियंता राजेश गुप्ता के निलंबन की अनुशंसा की थी। इसके बावजूद अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। मामला एक वर्ष से फाइलों में लंबित है, जिससे विभागीय प्रक्रियाओं और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
पाइपलाइन की उम्र पर असर की आशंका
मिशन संचालक की रिपोर्ट में कहा गया है कि SLSSC की स्वीकृति के बिना DPR में परिवर्तन नियम-विरुद्ध है। यदि O-PVC पाइप वास्तविक लोड व ग्राउंड स्ट्रक्चर के अनुरूप नहीं निकले तो भविष्य में पाइपलाइन की मजबूती, लीकेज जोखिम और संपूर्ण स्कीम की आयु पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर तकनीकी समिति से विस्तृत जांच की मांग की गई है।
यह मामला (Jal Jeevan Mission Scam) अभी भी विभागीय स्तर पर लंबित है, और कार्रवाई की प्रतीक्षा में कई प्रश्न खुले खड़े हैं। क्या DPR बदलने की अनुमति ली गई थी? पाइप चयन तकनीकी मानकों के अनुरूप था या नहीं? और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?


