सीजी भास्कर, 02 जनवरी। सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में सड़क संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते (Jammu Infrastructure Development) हुए सीमा सड़क संगठन (BRO) ने अपने 51वें रेजिंग डे के मौके पर जम्मू क्षेत्र में 18 नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का शुभारंभ किया। इन परियोजनाओं में 2 रणनीतिक सड़कें और 16 मजबूत पुल शामिल हैं, जिनका सीधा लाभ सेना की आवाजाही के साथ-साथ आम नागरिकों को भी मिलेगा।
BRO अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य सिर्फ सड़क बनाना नहीं, बल्कि हर मौसम में निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करना है। खासतौर पर बर्फबारी, भूस्खलन और भारी बारिश के दौरान जिन इलाकों का संपर्क टूट जाता है, वहां अब हालात तेजी से सुधरेंगे।
सुरंगों पर भी तेज़ी से काम
इन नई परियोजनाओं के साथ-साथ जम्मू क्षेत्र में चार अहम सुरंगों पर भी निर्माण कार्य जारी है। सुरंगें पूरी होने के बाद पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में सफर न सिर्फ सुरक्षित (Jammu Infrastructure Development) होगा, बल्कि समय भी काफी कम लगेगा। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे सामरिक तैयारियों को भी मजबूती मिलेगी।
दशकों से सड़क संपर्क की रीढ़
BRO का प्रोजेक्ट संपर्क पिछले पांच दशकों से जम्मू क्षेत्र में सड़क नेटवर्क को संभाल रहा है। वर्तमान में यह प्रोजेक्ट 101 सड़कों (करीब 1,523 किलोमीटर) का रखरखाव कर रहा है, जबकि 242 BRDP सड़कों (लगभग 3,840 किलोमीटर) पर निर्माण कार्य जारी है।
पिछले एक साल में 19 सड़क परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं, वहीं अभी करीब 1,600 किलोमीटर लंबी 33 सड़कें और 73 पुल अलग-अलग चरणों में निर्माणाधीन हैं।
रणनीतिक सड़कों पर खास फोकस
प्रोजेक्ट संपर्क की जिम्मेदारी में मुगल रोड, अखनूर–पूंछ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-144A) और बनी–बसोली–भद्रवाह सड़क जैसी बेहद अहम सड़कें शामिल हैं। ये मार्ग न सिर्फ सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह काम करते हैं।
आपदाओं में भी तत्परता
क्लाउडबर्स्ट, भूस्खलन, हिमस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान BRO की टीमें तेजी से सड़क संपर्क बहाल (Jammu Infrastructure Development) करती रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद संगठन ने समय पर कार्रवाई कर अपनी तकनीकी और मानवीय क्षमता साबित की है।
BRO के इन नए प्रोजेक्ट्स से जम्मू क्षेत्र में विकास को नई गति मिलने के साथ-साथ सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी आसान होने की उम्मीद है।





