सीजी भास्कर, 29 दिसंबर। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के शासकीय आदर्श महाविद्यालय, लोहारकोट में जेम पोर्टल (JEAM Portal Scam) के माध्यम से सरकारी राशि की खरीदी में घोटाला सामने आया है।
इसके तहत प्राचार्य डा. एसएस तिवारी और चार असिस्टेंट प्रोफेसर डा. सीमा अग्रवाल, डा. बृहस्पत सिंह विशाल, पीठी सिंह ठाकुर और डा. एसएस दीवान को निलंबित कर दिया गया है। मामला लगभग 1.06 करोड़ रुपये की खरीदी (जेम पोर्टल) से जुड़ा हुआ है, जिसमें सीधे चहेती फर्मों को लाभ देने की संलिप्तता पाई गई।
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा के निर्देश पर गठित जांच समिति ने पाया कि प्राचार्य ने अक्टूबर और नवंबर 2025 के बीच नियमों का उल्लंघन करते हुए एल वन मोड के जरिए सामग्री खरीदी। समिति के अनुसार, खरीदी प्रक्रिया पूरी तरह संदेहास्पद (JEAM Portal Scam) थी और दो महीने में ही 1 करोड़ से अधिक की खरीदी तत्काल सप्लाई के साथ हुई। जांच में यह भी सामने आया कि क्रय समिति में कालेज के स्टाफ की बजाय बाहरी सदस्य शामिल किए गए थे।
जांच समिति ने सिफारिश की कि दोषियों पर निलंबन, राशि वसूली और एफआइआर की कार्रवाई की जाए। प्राचार्य और चार सहायक प्राध्यापकों का मुख्यालय अब क्षेत्रीय अपर संचालक कार्यालय, रायपुर रहेगा। समिति ने यह भी उल्लेख किया कि जांजगीर की तीन फर्मों सागर इंडस्ट्रीज, सिंघानिया ग्रुप और ओशन इंटरप्राइजेज एक ही परिवार की हैं, जिससे गड़बड़ी की पुष्टि होती है।
राजिम, बिलासपुर के बाद महासमुंद का यह मामला यह दर्शाता है कि पारदर्शिता के लिए बने जेम पोर्टल (जेम पोर्टल) का दुरुपयोग भी संभव है। अधिकारियों ने कहा कि इस घटना से स्पष्ट होता है कि सरकारी खरीद प्रक्रिया में निगरानी और सख्ती जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे घोटालों को रोका जा सके।
उच्च शिक्षा आयुक्त की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि निलंबन और राशि वसूली के साथ ही संबंधित अधिकारियों को नियमों का पालन करने की सख्त चेतावनी दी गई है। इससे स्पष्ट है कि सरकार जेम पोर्टल (जेम पोर्टल) के दुरुपयोग पर शून्य सहनशीलता का संदेश देना चाहती है।
इस मामले से शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता फिर से उजागर हुई है। जनता का विश्वास बनाए रखने और सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में शीघ्र कार्रवाई करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


