सीजी भास्कर, 07 मई : कबीरधाम के सुदूर और दुर्गम जंगलों में जहां प्रकृति की सुंदरता दिखती है, वहीं भीतर गुलामी (Kabirdham Child Labour Rescue) का एक काला खेल चल रहा था। पुलिस और प्रशासन की टीम ने जब यहां छापेमारी की, तो मंजर देख सबकी रूह कांप गई। संरक्षित बैगा जनजाति के 13 मासूम बच्चे, जिनकी उम्र महज 8 से 15 साल है, यहाँ मवेशियों की देखभाल के नाम पर बंधुआ मजदूरी की आग में झोंके गए थे।
साजिश और लालच का जाल
यह पूरा गिरोह करीब 7-8 महीने पहले इन बच्चों (Kabirdham Child Labour Rescue) को उनके परिजनों से बेहतर भविष्य और रुपयों का लालच देकर लाया था। लेकिन यहां की हकीकत कुछ और ही निकली। इन मासूमों से रोजाना 10-10 घंटे हाड़तोड़ काम लिया जाता था और बदले में महीने के नाम पर सिर्फ एक-दो हजार रुपए थमा दिए जाते थे। ये बच्चे किसी जेल जैसी स्थिति में रह रहे थे।
ऐसे चला रेस्क्यू आपरेशन
एसोसिएशन फार वालंटरी एक्शन (AVA) इस गिरोह (Kabirdham Child Labour Rescue) पर पिछले दो हफ्तों से नजर रख रही थी। पुख्ता जानकारी मिलते ही कबीरधाम एसपी धर्मेंद्र सिंह ने मोर्चा संभाला। पुलिस, चाइल्डलाइन और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम ने जब पहले पशुपालन फार्म पर दबिश दी, तो वहां 4 बच्चे मिले। इसके बाद उन डरे हुए मासूमों के इशारे पर टीम जंगलों के उन कोनों तक पहुंची जहां बाकी बच्चों को छिपाकर रखा गया था। पूरे दिन चले इस अभियान में कुल 13 बच्चों को सुरक्षित निकाला गया।
कानूनी कार्रवाई और पुनर्वास
पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन पर ट्रैफिकिंग, बंधुआ मजदूरी और किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। मुक्त कराए गए बच्चों को फिलहाल बाल संरक्षण संस्थानों में भेजा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग और स्वास्थ्य जांच की जा रही है।
अधिकारियों का पक्ष
पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि यह नेटवर्क काफी गहरा है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। वहीं बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि अब सबसे बड़ी चुनौती इन बच्चों का पुनर्वास और उनकी शिक्षा सुनिश्चित करना है, ताकि इनका खोया हुआ बचपन वापस मिल सके।


