Kalkaji Mass Suicide Case: दिल्ली के कालकाजी इलाके में सामने आए सामूहिक आत्महत्या मामले ने जांच एजेंसियों को भी झकझोर कर रख दिया है। तफ्तीश में खुलासा हुआ है कि इस घटना से करीब दो महीने पहले कपूर परिवार के दोनों बेटे—आशीष और चैतन्य—पहले भी अपनी जान लेने की कोशिश कर चुके थे। समय रहते उन्हें अस्पताल पहुंचा दिया गया था, जिससे उस वक्त उनकी जान बच गई थी।
मानसिक और आर्थिक दबाव में घिरा परिवार
जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, परिवार लंबे समय से मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और सामाजिक दबाव से जूझ रहा था। मां अनुराधा कपूर अकेले ही घर की जिम्मेदारियां संभाल रही थीं, जबकि दोनों बेटे बेरोजगार थे। हालात ऐसे बन चुके थे कि घर के भीतर लगातार बेचैनी और असुरक्षा का माहौल बना रहता था।
किराए का विवाद और कोर्ट नोटिस बना बड़ा झटका
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कपूर परिवार दिसंबर 2023 में कालकाजी के एक फ्लैट में किराए पर रहने आया था। शुरुआती महीनों के बाद किराया न दे पाने के कारण मकान मालिक से विवाद बढ़ता चला गया। मामला अदालत तक पहुंचा और फैसला मकान मालिक के पक्ष में आया। बताया जा रहा है कि कोर्ट का नोटिस मिलने का दिन परिवार के लिए भावनात्मक रूप से बेहद भारी साबित हुआ।
मुखिया की मौत के बाद और बिगड़े हालात
परिवार की परेशानियों की जड़ें इससे भी गहरी बताई जा रही हैं। जांच में सामने आया है कि प्रॉपर्टी कारोबार में भारी नुकसान के बाद परिवार कर्ज के बोझ तले दब गया था। वर्ष 2024 में परिवार के मुखिया की मौत के बाद हालात और बिगड़ गए। आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं बचा और कर्ज का दबाव लगातार बढ़ता गया।
पहले की घटना के बाद भी संपर्क में थी पुलिस
पड़ोसियों के अनुसार, पहले आत्महत्या के प्रयास के बाद से पुलिस समय-समय पर परिवार से संपर्क में थी और स्थिति पर नजर रखी जा रही थी। इसके बावजूद हालात धीरे-धीरे ऐसे मोड़ पर पहुंच गए, जहां से वापसी संभव नहीं हो सकी। यह पहलू जांच एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है।
फोरेंसिक जांच में खंगाले जा रहे डिजिटल सबूत
फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। घर से मिले दस्तावेजों, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। साथ ही रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क कर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि हाल के दिनों में परिवार किन परिस्थितियों से गुजर रहा था।





