Kanan Pendari Bilaspur News : बिलासपुर के कानन पेंडारी जूलॉजिकल गार्डन के वन्यप्राणियों के लिए शुक्रवार का दिन खुशखबरी लेकर आया। कोनी स्थित सरकारी कुक्कुट पालन केंद्र में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद से लगा 17 दिनों का प्रतिबंध अब हटा लिया गया है। इसके साथ ही चिड़ियाघर के मांसाहारी जानवरों को उनका पसंदीदा आहार—चिकन, अंडा और चूजे—दोबारा मिलना शुरू हो गया है।
सांपों ने निगले चूजे, बाघों को मिला चिकन
प्रतिबंध हटने के बाद आहार वितरण की प्रक्रिया फिर से शुरू की गई:
- सरीसृप अनुभाग: सांपों के केज में जैसे ही 17 दिन बाद चूजे डाले गए, वे उन्हें तेजी से निगलते नजर आए।
- बड़े शिकारी जानवर: टाइगर, लॉयन (शेर), पैंथर और लेपर्ड को उनके निर्धारित डाइट के अनुसार चिकन परोसा गया।
- अन्य वन्यप्राणी: कई अन्य मांसाहारी जीवों और पक्षियों को उबले हुए अंडे दिए गए, जो उनके पोषण के लिए अनिवार्य हैं।
क्यों लगा था प्रतिबंध? (25 मार्च से रोक)
कोनी स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू के वायरस मिलने के बाद प्रशासन ने सुरक्षात्मक कदम उठाते हुए 25 मार्च से 10 से 12 किलोमीटर के दायरे में चिकन और अंडे की बिक्री व उपभोग पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। कानन पेंडारी इसी दायरे में आता है, जिसके कारण वन्यप्राणियों के आहार चार्ट में बदलाव करना पड़ा था। इस दौरान उन्हें चिकन की जगह बकरे या सूअर का मांस दिया जा रहा था।
शर्तों के साथ मिली अनुमति
हाल ही में दिल्ली और छत्तीसगढ़ के विशेषज्ञों व डॉक्टरों की एक संयुक्त टीम ने प्रभावित कुक्कुट पालन क्षेत्र का सघन निरीक्षण किया। स्थिति नियंत्रण में पाए जाने के बाद प्रशासन ने कुछ विशेष शर्तों के साथ अनुमति दी है:
- स्थानीय स्रोत: फिलहाल चिकन और अंडे की आपूर्ति स्थानीय सुरक्षित क्षेत्रों से ही की जाएगी।
- निगरानी: आपूर्ति की जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता और स्वास्थ्य मानकों की कड़ी जांच जारी रहेगी।
कानन पेंडारी प्रबंधन ने बताया कि वन्यप्राणियों को सप्ताह में दो-दो दिन अलग-अलग प्रकार का मांस (चिकन, मटन और पोर्क) दिया जाता है। अब आहार व्यवस्था पूरी तरह से सामान्य हो गई है, जिससे जानवरों के स्वास्थ्य और व्यवहार में सकारात्मक सुधार की उम्मीद है।


