सीजी भास्कर, 22 दिसंबर। बस्तर संभाग के कांकेर जिले में मतांतरण को लेकर उपजा तनाव अब गांव-गांव तक फैल चुका है। क्षेत्र में शुरू हुआ यह विवाद अब एक बड़े Kanker Conversion Issue के रूप में सामने आ रहा है। भानुप्रतापपुर विकासखंड के कुड़ाल गांव से शुरू हुई यह मुहिम अब कांकेर जिले के 14 से अधिक गांवों तक पहुंच गई है। इन गांवों की सीमाओं पर बाकायदा बोर्ड लगाकर पादरियों (पास्टरों) के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
बस्तर संभाग की लगभग 67 प्रतिशत जनसंख्या आदिवासी है, जिनमें से करीब सात प्रतिशत लोगों के मतांतरण का दावा किया जा रहा है। वहीं अनुसूचित जाति की लगभग तीन लाख आबादी वाली माहरा जाति में 95 प्रतिशत तक मतांतरण होने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाहरी हस्तक्षेप और प्रलोभन के जरिए मतांतरण कराया जा रहा है, जिसके चलते पारंपरिक सामाजिक संरचना खतरे में पड़ रही है। यह पूरा मामला अब गंभीर Kanker Conversion Issue बन चुका है।
विवाद की जड़ आमाबेड़ा क्षेत्र के बड़ेतेवड़ा गांव से जुड़ी है, जहां अंतिम संस्कार को लेकर हुए विवाद और हिंसा के बाद मतांतरण विरोधी माहौल और तेज हुआ। ग्रामीणों और सरपंचों का कहना है कि यह कदम किसी धर्म के विरोध में नहीं, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक सुरक्षा के लिए है। उनका तर्क है कि बाहरी गतिविधियों से आदिवासी परंपराएं कमजोर हो रही हैं।
ग्रामीणों ने पेसा अधिनियम 1996 के तहत ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया। कुड़ाल, मुसुरपुट्टा और कोड़ेकुर्रो सहित अब तक 14 से अधिक गांवों में बोर्ड लगाए जा चुके हैं। कई अन्य गांवों में भी इस तरह का प्रस्ताव लाने की तैयारी है। बोर्ड में स्पष्ट लिखा है कि गांवों में धार्मिक आयोजन और प्रचार पर रोक रहेगी।
इस बीच, कांकेर का यह मामला कानूनी स्तर पर भी मजबूत होता दिख रहा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ग्राम सभा के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि जबरन या प्रलोभन आधारित मतांतरण रोकना असंवैधानिक नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण का अधिकार है। अदालत का यह फैसला भी स्थानीय लोगों के लिए Kanker Conversion Issue में समर्थन जैसा साबित हुआ है।
मतांतरण को लेकर सामाजिक तनाव बढ़ा
अगस्त 2025 में कुड़ाल गांव में ग्राम सभा के माध्यम से पादरियों के प्रवेश पर रोक का बोर्ड लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद यह अभियान तेजी से परवी, जनकपुर, भीरागांव, घोडागांव, जुनवानी, हवेचुर, घोटा, घोटिया, सुलंगी, टेकाठोडा, बांसला, जामगांव, चारभाठा और मुसुरपुट्टा जैसे गांवों में फैल गया। नरहरपुर ब्लॉक के जामगांव में करीब 14-15 परिवारों द्वारा अघोषित रूप से ईसाई धर्म अपनाए जाने का मामला भी सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता गौरव राव के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम Kanker Conversion Issue को और जटिल बना रहा है।
बोर्ड में लिखा है
“गांव में आदिवासियों को प्रलोभन देकर मतांतरण करना हमारी संस्कृति और पहचान को नुकसान पहुंचाता है। ग्राम सभा के प्रस्ताव पर पास्टर, पादरी एवं मतांतरित व्यक्तियों के धार्मिक उद्देश्य से प्रवेश पर प्रतिबंध है। गौरव राव, सामाजिक कार्यकर्ता ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि चंगाई सभाओं के लिए ग्राम सभा की अनुमति नहीं ली जाती। छोटे घरों में प्रार्थना सभाएं हो रही हैं। मतांतरण के बाद नाम नहीं बदले जा रहे, जो नियम विरुद्ध है।”


