सीजी भास्कर 26 फ़रवरी कांकेर। (Kanker Maoist surrender) के तहत उत्तर बस्तर के जंगलों से लगातार सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। बीते तीन दिनों में तीन हार्डकोर माओवादी हथियारों के साथ मुख्यधारा में लौटे हैं। यह बदलाव उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए इलाके को (counter insurgency operation) के माध्यम से हिंसा से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
25 लाख के इनामी उग्रवादियों का आत्मसमर्पण
सूत्रों के मुताबिक आत्मसमर्पण करने वालों में बड़े कैडर के सदस्य शामिल हैं, जिन पर इनाम घोषित था। तीनों ने AK-47 के साथ सरेंडर कर यह संदेश दिया कि अब वे हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाना चाहते हैं। इसे (rehabilitation of militants) की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
उत्तर बस्तर में अब कितने सक्रिय माओवादी बचे
पुलिस के आकलन के अनुसार उत्तर बस्तर के दुर्गम इलाकों में अभी भी सीमित संख्या में माओवादी सक्रिय हैं। लगातार हो रहे सरेंडर और दबाव के चलते उनके नेटवर्क कमजोर पड़े हैं। अधिकारियों का मानना है कि (ground intelligence) मजबूत होने से शेष कैडर पर मनोवैज्ञानिक दबाव बना है।
दशकों की दहशत से निकलने की कोशिश
उत्तर बस्तर का बड़ा हिस्सा वर्षों से नक्सलवाद की मार झेलता आया है। दुर्गम जंगलों में बसे गांवों तक विकास की पहुंच बाधित रही, लेकिन अब सुरक्षा बलों की निरंतर मौजूदगी से भरोसा लौट रहा है। (development in conflict zones) के तहत सड़क, संचार और बुनियादी सुविधाओं पर काम तेज हुआ है।
पुलिस ने जारी किया हेल्पलाइन, लौटने का खुला रास्ता
पुलिस प्रशासन ने हिंसा छोड़कर लौटना चाहने वालों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। अधिकारियों का कहना है कि (safe surrender policy) के तहत सरेंडर करने वालों को सुरक्षा, काउंसलिंग और पुनर्वास की सुविधा दी जा रही है, ताकि वे नई शुरुआत कर सकें।
रणनीतिक दबाव से टूट रहा कैडर
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक बड़े कैडर के टूटने से शेष माओवादियों का मनोबल कमजोर पड़ा है। लगातार ऑपरेशंस और खुफिया सूचनाओं के चलते (maoist network crackdown) तेज हुआ है, जिससे आने वाले दिनों में और सरेंडर की उम्मीद जताई जा रही है।






