सीजी भास्कर 2 दिसम्बर कानपुर के जूही यार्ड के पास सोमवार की सुबह अचानक हड़कंप मच गया, जब Kanpur Student Suicide से जुड़ी खबर फैलते ही लोग पटरियों की ओर भागने लगे। पटरियों पर 10वीं के सिटी टॉपर रौनक पाठक का क्षत-विक्षत शव पड़ा था। पास ही उसकी बाइक उतनी ही चुपचाप खड़ी थी, जैसे वह भी किसी अंजाने सवाल का जवाब तलाश रही हो।
शांत स्वभाव का मेधावी छात्र, जिसने सबको चौंका दिया
रौनक बृज किशोरी देवी मेमोरियल स्कूल में इंटरमीडिएट का छात्र था। हाईस्कूल में उसने 97.04% अंक पाकर न सिर्फ अपने परिवार को गर्व महसूस कराया था, बल्कि स्कूल में भी उसे टॉपर्स की सूची में खास जगह मिली थी। शिक्षकों और पड़ोसियों के मुताबिक उसका स्वभाव बेहद शांत, सीधा और पढ़ाई पर केंद्रित था।
लेकिन उसी शांत लड़के ने ऐसा कदम क्यों उठाया—यह सवाल अब भी सबको बेचैनी में डाल रहा है।
Kanpur Student Suicide: घर से निकला तो किसी को उम्मीद नहीं थी कि यह आखिरी बार होगा
रौनक के पिता आलोक पाठक ने बताया, “सुबह 6:30 बजे वह बाइक लेकर निकला था। हम लोगों को लगा कि शायद पढ़ाई या क्लास के लिए जा रहा होगा… पर जब काफी देर तक उसका फोन नहीं उठा, तो बेचैनी बढ़ती चली गई।”
परिवार ने उसे हर जगह ढूंढा—दोस्तों से पूछा, रास्तों पर तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
फिर रेलवे क्रॉसिंग पर खड़ी मिली उसकी बाइक, और कुछ कदम बाद ट्रैक पर पड़ा उसका शव… यह दृश्य देखकर मां ललिता की चीखें दूर तक सुनाई दीं। बेहोशी की हालत से उठते ही वह बस एक ही बात कह रहीं थीं—“रौनक, बेटा… हमारे साथ ऐसा क्यों किया?”
डिजिटल डिवाइस खोल सकते हैं राज
घटना की जानकारी मिलते ही GRP मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस फिलहाल रौनक के मोबाइल, लैपटॉप और कॉल रिकॉर्ड (Suicide Reason Investigation) खंगाल रही है।
जांच टीम का कहना है कि पढ़ाई का दबाव या किसी व्यक्तिगत तनाव को नकारा नहीं जा सकता। दोस्तों और सहपाठियों से भी पूछताछ की जा रही है कि क्या रौनक हाल ही में किसी दुविधा या तनाव में था।
Kanpur Student Suicide: इलाके में सन्नाटा, स्कूल में शोक
रौनक की मौत की खबर फैलते ही पूरे इलाके में माहौल गमगीन हो गया। स्कूल में भी शिक्षकों और छात्रों के चेहरे उतर गए। कई लोग इसे आज की शिक्षा प्रणाली के बढ़ते दबाव का परिणाम मान रहे हैं।
लोग बार-बार पूछ रहे हैं—इतना मेधावी, शांत और आगे बढ़ने का जज़्बा रखने वाला लड़का आखिर किस मोड़ पर टूट गया?
परिवार पर टूटा पहाड़, पड़ोस में मातम
रौनक की बड़ी बहन मिनी और पिता आलोक इस सदमे से उबर नहीं पा रहे। मां की हालत बार-बार बिगड़ रही है।
घर में सिर्फ सन्नाटा है और दीवारों पर टंगे रौनक के मेडल, सर्टिफिकेट और ट्रॉफियां जैसे सवाल पूछ रहे हों—क्या पढ़ाई का दबाव इतना भारी हो गया कि एक उज्ज्वल भविष्य वहीं पटरी पर खत्म हो गया?






