सीजी भास्कर, 27 मई : जांजगीर-चांपा जिले के सबसे सनसनीखेज और वीभत्स मामलों में से एक ‘करही गोलीकांड’ के मुख्य सूत्रधार तक आखिरकार कानून के हाथ पहुंच ही गए हैं। पुलिस ने “ऑपरेशन हंट” के तहत एक बड़ी और निर्णायक कामयाबी हासिल करते हुए इस पूरे हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड गणपत बघेल को दबोच लिया है। पुलिस द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई (Karhi Shooting Mastermind Arrested) के बाद क्षेत्र में फैले भारी आक्रोश और तनाव के बीच लोगों ने राहत की सांस ली है।
पुलिस के आला अधिकारियों ने बताया कि इस खूनी खेल की मुख्य वजह अवैध रेत का काला कारोबार, बाजार में आपसी आर्थिक प्रतिस्पर्धा और व्यक्तिगत द्वेष थी। इसी प्रतिशोध की आग में जलकर आरोपित ने अपने साथियों के साथ मिलकर कांग्रेस नेता सम्मेलाल कश्यप के निर्दोष बेटे आयुष कश्यप की बेहद बर्बर और सुनियोजित तरीके से हत्या की साजिश रची थी। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपित के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई घातक पिस्टल और मैगजीन भी बरामद कर ली है। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपित को स्थानीय न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे कड़े पहरे में न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
रेत के काले धंधे का खूनी अंत
पुलिस की कड़ी पूछताछ के दौरान पकड़े गए मास्टरमाइंड गणपत बघेल ने जो खुलासे किए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। आरोपित ने कबूल किया कि उसने भारी-भरकम लोन लेकर हाईवा और जेसीबी मशीनें खरीदी थीं। इन गाड़ियों की मोटी मासिक किस्त चुकाने के दबाव में वह अवैध रूप से रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन के धंधे में उतर गया। ठीक इसी समय, मृतक आयुष कश्यप भी रेत परिवहन और बिक्री के कारोबार में सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था।
आयुष बाजार में कम कीमत पर रेत उपलब्ध करा रहा था, जिससे उसकी साख और ग्राहकी तेजी से बढ़ रही थी। इस वजह से गणपत के पुराने ग्राहक टूटकर आयुष के पास जाने लगे, जिससे गणपत को हर महीने भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा था। आयुष की इसी बढ़ती प्रगति को देख गणपत के मन में नफरत का बीज पनप गया। उसे यह भी डर था कि आयुष राजस्व विभाग की टीम से साठगांठ कर उसकी गाड़ियां पकड़वा सकता है। इसी आर्थिक नुकसान और डर के चलते उसने अपने साथी अमित टंडन, भूषण बघेल और हेमंत बघेल के साथ मिलकर आयुष को रास्ते से हटाने का खौफनाक मंसूबा तैयार किया।
आधी रात का वो खौफनाक मंजर
इस पूरे हत्याकांड को जिस बेरहमी से अंजाम दिया गया, उसने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। बीती 23-24 अप्रैल की दरम्यानी रात को जब पूरा परिवार गहरी नींद में सोया था, तब तीन नकाबपोश शूटर कल्पेश के साथ ग्राम करही स्थित आयुष कश्यप के घर पर धावा बोलते हैं। घर के भीतर कदम रखने से पहले बदमाशों ने बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों को पूरी तरह नष्ट कर दिया ताकि कोई सबूत न बचे।
इसके बाद अमित टंडन, भूषण बघेल और हेमंत बघेल दबे पांव घर के अंदर दाखिल हुए। उन्होंने सबसे पहले आयुष के पिता के कमरे के दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया ताकि कोई मदद के लिए बाहर न आ सके। इसके बाद वे सीधे आयुष के कमरे में घुसे और सो रहे मासूम युवक पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। गोलियों की आवाज सुनकर जब आयुष का छोटा भाई बीच-बचाव करने भागा, तो बेरहम हत्यारों ने उस पर भी जानलेवा फायरिंग (Karhi Shooting Mastermind Arrested) कर दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी हत्यारे अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से रफूचक्कर हो गए थे।
साइबर सेल की मुस्तैदी से खुला राज
वारदात के तुरंत बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन डॉग स्क्वॉड, फॉरेंसिक एक्सपर्ट और साइबर सेल की संयुक्त टीमों को काम पर लगाया गया। जांच के दौरान पुलिस की विशेष टीम ने हाइवे और रिहायशी इलाकों के 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले।
साइबर तकनीक, मोबाइल टावर डंप डेटा और मुखबिरों से मिले पुख्ता सुरागों के आधार पर पुलिस कड़ियों को जोड़ती चली गई। कड़ाई से की गई तफ्तीश के बाद पुलिस ने इस मामले में पहले ही तीन सह-आरोपियों हेमंत बघेल, भूषण बघेल और अमित टंडन को धरदबोचा था, जो वर्तमान में जेल की सलाखों के पीछे हैं। अब इस पूरे जघन्य हत्याकांड के मुख्य सरगना गणपत बघेल की गिरफ्तारी (Karhi Shooting Mastermind Arrested) के बाद पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य सफेदपोशों और मददगारों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।




