सीजी भास्कर, 25 मई : कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन (Karnataka Leadership Crisis) और सत्ता संतुलन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar को कांग्रेस आलाकमान ने 26 मई को दिल्ली बैठक के लिए बुलाया है। इसके बाद राज्य की राजनीति में कैबिनेट फेरबदल और मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेता दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। बैठक में राज्यसभा की तीन सीटों, विधान परिषद की नौ सीटों और संगठनात्मक समीकरणों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
Karnataka Leadership Crisis फिर क्यों चर्चा में
कर्नाटक सरकार (Karnataka Leadership Crisis) ने हाल ही में अपने कार्यकाल के तीन साल पूरे किए हैं। इसी के साथ सत्ता साझेदारी को लेकर पुरानी चर्चाएं फिर सामने आने लगी हैं। डीके शिवकुमार समर्थकों का दावा है कि 2023 विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर एक “सत्ता साझेदारी फार्मूला” बना था, जिसके तहत बाद में उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाना था।
हालांकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया लगातार यह कहते रहे हैं कि वे पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि वे पार्टी हाईकमान के हर फैसले का पालन करेंगे। वहीं शिवकुमार भी सार्वजनिक तौर पर यही कह रहे हैं कि अंतिम फैसला कांग्रेस नेतृत्व करेगा।
कैबिनेट फेरबदल की मांग
कांग्रेस (Karnataka Leadership Crisis) के भीतर कई विधायक लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की मांग कर रहे हैं। कई नेता मंत्री बनने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाकर नए चेहरों को मौका दिया जाए।
बताया जा रहा है कि कुछ विधायक इस मुद्दे को लेकर दिल्ली में पार्टी नेतृत्व से मुलाकात भी कर चुके हैं। वहीं कुछ और विधायक जल्द राजधानी पहुंचकर दबाव बनाने की तैयारी में हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में माने जा रहे हैं, जबकि शिवकुमार पहले नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर स्पष्टता चाहते हैं।
कांग्रेस आलाकमान पर बढ़ा दबाव
पार्टी के भीतर यह चिंता भी बढ़ रही है कि नेतृत्व परिवर्तन की लगातार चर्चाओं का असर सरकार की कार्यशैली और कांग्रेस की छवि पर पड़ रहा है। कई नेताओं का मानना है कि 2028 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को यह विवाद जल्द खत्म करना होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि कांग्रेस आलाकमान कैबिनेट फेरबदल को मंजूरी देता है तो इसे सिद्धारमैया के पूरे कार्यकाल के संकेत के तौर पर देखा जाएगा। इससे डीके शिवकुमार की मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं को झटका लग सकता है।
तीन मंत्री पद अभी भी खाली
कर्नाटक मंत्रिमंडल में फिलहाल तीन पद खाली हैं। एक मंत्री ने कथित वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों के बाद इस्तीफा दिया था, जबकि दूसरे मंत्री को संगठनात्मक कारणों से हटाया गया। हाल ही में एक मंत्री के निधन के बाद तीसरा पद खाली हुआ है। यही वजह है कि मंत्रिमंडल विस्तार की मांग और तेज हो गई है। कांग्रेस के भीतर कई क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने का दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
Karnataka Leadership Crisis से कांग्रेस की बढ़ी मुश्किल
कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने पार्टी के भीतर असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। एक ओर सिद्धारमैया समर्थक स्थिर नेतृत्व की बात कर रहे हैं, वहीं शिवकुमार समर्थक सत्ता साझेदारी समझौते का हवाला दे रहे हैं। ऐसे में आलाकमान के फैसले पर पूरे देश की नजरें टिक गई हैं।
26 मई की दिल्ली बैठक को कर्नाटक कांग्रेस के भविष्य के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। बैठक के बाद यह साफ हो सकता है कि पार्टी नेतृत्व कैबिनेट फेरबदल के रास्ते पर आगे बढ़ेगा या फिर सत्ता परिवर्तन की अटकलों पर विराम लगेगा।



