सीजी भास्कर 12 दिसम्बर शुक्रवार का शून्यकाल सामान्य नहीं रहा. Karthigai Deepam Issue पर जैसे ही भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने आवाज उठाई, सदन का माहौल अचानक गरमा गया. उन्होंने तमिलनाडु सरकार पर मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच के आदेश की अनदेखी करने का आरोप लगाया, जिसके साथ ही विपक्षी सांसदों ने कड़ा प्रतिवाद शुरू कर दिया. हंगामा बढ़ा तो कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी.
अनुराग ठाकुर का आरोप—‘आदेश की अवमानना, श्रद्धालुओं पर लाठीचार्ज’
सदन में अपनी बात रखते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार का रवैया सनातन पर विरोध के संकेत जैसा प्रतीत हो रहा है. उन्होंने दावा किया कि कोर्ट के निर्देश के बावजूद श्रद्धालुओं को दीप प्रज्वलित नहीं करने दिया गया, और कई स्थानों पर लाठीचार्ज भी हुआ. उनके बयान के बाद Karthigai Deepam Issue पर सदन में शोर-शराबा और अधिक तेज हो गया.
DMK सांसदों का कड़ा विरोध—आसन के पास पहुंचा दल
जैसे ही ठाकुर ने आरोपों का सिलसिला जारी रखा, डीएमके सांसद अपनी सीटों से उठकर आसन की ओर बढ़ गए. उन्होंने सरकार पर गलत जानकारी रखने का आरोप लगाया और पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया. बढ़ते शोर के बीच सभापति ने व्यवस्था बनाने के प्रयास किए लेकिन बेअसर रहने पर कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
SC पहुंचा मामला—हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ तमिलनाडु सरकार की याचिका
इस पूरे विवाद का कानूनी पक्ष भी उसी दिन और मजबूत हुआ. तमिलनाडु सरकार ने मंदिर परिसर के पास स्थित क्षेत्र में कार्तिगई दीपम प्रज्वलित करने की अनुमति देने वाले मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की याचिका को स्वीकार करते हुए 5 दिसंबर सुनवाई के लिए निर्धारित कर दी. यह कदम Karthigai Deepam Issue को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चा में ले आया है.
हाई कोर्ट की मदुरै बेंच का फैसला—श्रद्धालुओं के पक्ष में आदेश बरकरार
इससे ठीक पहले, मदुरै बेंच ने जिला प्रशासन और पुलिस की अपील को खारिज कर दिया था, और एकल न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा था जिसमें श्रद्धालुओं को दीप प्रज्वलित करने की अनुमति दी गई थी. जब आदेश लागू नहीं हुआ, तो जज ने एक और निर्देश जारी कर श्रद्धालुओं को स्वयं दीप जलाने और सुरक्षा हेतु केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की तैनाती का आदेश दिया.
जज के खिलाफ प्रस्ताव—दिल्ली में भी गूंजा विवाद
मामला यहीं नहीं रुका. जिस जज ने आदेश दिया था, उनके खिलाफ कई राजनीतिक दलों ने लोकसभा स्पीकर को महाभियोग संबंधी नोटिस सौंप दिया. आरोप लगाया गया कि आदेश न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है. दूसरी ओर, 50 से अधिक पूर्व जज जज जी.आर. स्वामीनाथन के समर्थन में खड़े हो गए, जिससे यह विवाद केंद्र तक पहुंच गया और अब Karthigai Deepam Issue राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में खड़ा है.





