सीजी भास्कर, 09 मार्च। छत्तीसगढ़ विधानसभा में धान खरीदी का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। बस्तर संभाग में धान खरीदी (Kawasi Lakhma Question Assembly) नहीं होने का आरोप लगाते हुए विधायक कावासी लखमा ने सरकार से कई अहम सवाल पूछे। इस मुद्दे पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद विपक्ष ने विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया।
सदन में कावासी लखमा ने कहा कि बस्तर क्षेत्र के कई किसानों ने कर्ज लेकर धान की खेती की, लेकिन उनका धान नहीं खरीदा गया। ऐसे में उन्होंने सरकार से पूछा कि जिन किसानों ने कर्ज लेकर खेती की और उनकी उपज की खरीदी नहीं हुई, क्या सरकार उनका कर्ज माफ करेगी।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बस्तर संभाग के जिलों – दंतेवाड़ा, नारायणपुर, बस्तर, कोंडागांव और सुकमा-में धान बेचने के लिए कितने किसान (Kawasi Lakhma Question Assembly) पंजीकृत हैं। इसके अलावा उन्होंने यह जानकारी भी मांगी कि इन जिलों में कितने किसानों ने धान बेचा, कितने किसानों को टोकन जारी किए गए और कितने ऐसे किसान हैं जिन्हें टोकन मिलने के बाद भी धान बेचने का अवसर नहीं मिल पाया।
धान खरीदी को लेकर उठे सवालों के कारण सदन का माहौल कुछ समय के लिए काफी गरमा गया। विपक्षी सदस्यों ने किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार से स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
मामले पर जवाब देते हुए खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि सरकार द्वारा सभी पंजीकृत किसानों से धान की खरीदी (Kawasi Lakhma Question Assembly) की गई है। उन्होंने सदन में बस्तर संभाग के जिलों से जुड़े आंकड़े भी प्रस्तुत किए।
मंत्री द्वारा दिए गए विवरण के अनुसार वर्ष 2025-26 में समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए किसानों का पंजीयन और खरीदी की स्थिति इस प्रकार है-
बस्तर जिला – 50,273 किसान पंजीकृत, 40,667 किसानों ने धान बेचा, कुल 2,81,742.56 मीट्रिक टन धान की खरीदी।
दंतेवाड़ा जिला – 13,930 किसान पंजीकृत, 7,518 किसानों ने धान बेचा, 22,842.08 मीट्रिक टन धान की खरीदी।
कोंडागांव जिला – 55,205 किसान पंजीकृत, 47,471 किसानों ने धान बेचा, 3,23,630.48 मीट्रिक टन धान की खरीदी।
नारायणपुर जिला – 11,972 किसान पंजीकृत, 7,715 किसानों ने धान बेचा, 38,950 मीट्रिक टन धान की खरीदी।
सुकमा जिला – 18,833 किसान पंजीकृत, 14,549 किसानों ने धान बेचा, 86,730.96 मीट्रिक टन धान की खरीदी।
मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूरी तरह गंभीर है और पंजीकृत किसानों से नियमानुसार धान खरीदी (Kawasi Lakhma Question Assembly) की गई है। हालांकि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने विरोध जताया और अंततः सदन से बहिर्गमन कर दिया। धान खरीदी को लेकर उठे इस मुद्दे ने बस्तर संभाग के किसानों की स्थिति और खरीदी व्यवस्था को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।





