सीजी भास्कर, 21 अगस्त : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम टेहका निवासी 23 वर्षीय योगेश साहू ने ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ (KBC 18 Winner) में शानदार प्रदर्शन करते हुए 50 लाख रुपए जीत लिए। 1 करोड़ रुपए के सवाल पर उन्होंने गेम क्विट करने का फैसला किया। योगेश अब IAS अधिकारी बनने के लिए UPSC की तैयारी कर रहे हैं।
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अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर पहुंचे योगेश
‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ (KBC 18 Winner) के एपिसोड में योगेश अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर पहुंचे। शो में उनकी पढ़ाई, संघर्ष और भविष्य के लक्ष्य को लेकर भी चर्चा हुई। योगेश की कहानी सुनकर अमिताभ बच्चन भी प्रभावित नजर आए।
आर्थिक परेशानियों के बावजूद योगेश ने पढ़ाई जारी रखी और IIT बॉम्बे में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। उन्होंने संस्थान में शानदार प्रदर्शन किया और टॉपर भी रहे। पढ़ाई पूरी करने के बाद कैंपस प्लेसमेंट के जरिए उन्हें करीब 1.5 लाख रुपए प्रतिमाह की नौकरी मिली।
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50 लाख के सवाल ने बढ़ाई मुश्किल
KBC में योगेश के सामने 50 लाख रुपए का सवाल आया। सवाल में अलग-अलग शहरों और वर्षों के बीच संबंध पहचानना था। टेबल में कोलकाता-1913, एक अज्ञात शहर-1930, स्कोप्जे-1979, शांतिनिकेतन-1998 और विदिशा-2014 दिया गया था।
इसके विकल्पों में त्रिशूर, मैसूर, अल्मोड़ा और तिरुचिरापल्ली शामिल थे। सवाल कठिन होने पर योगेश ने अपनी आखिरी लाइफलाइन का इस्तेमाल किया।
हिंट से मिला सही जवाब
लाइफलाइन में संकेत मिला कि सही जवाब तमिलनाडु का एक शहर है। इसके बाद योगेश ने वर्षों और शहरों के बीच संबंध को समझने की कोशिश की। उन्होंने पहचान लिया कि ये नोबेल पुरस्कार से जुड़े संकेत हैं। इसके बाद उन्होंने तिरुचिरापल्ली को जवाब चुना, जो सही निकला और उन्होंने 50 लाख रुपए जीत लिए।
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1 करोड़ के सवाल पर क्विट किया गेम
50 लाख रुपए जीतने के बाद योगेश के सामने 1 करोड़ रुपए का सवाल आया। इस पड़ाव पर उन्होंने जोखिम नहीं लेने का फैसला किया और गेम क्विट कर दिया। इस तरह वह 50 लाख रुपए की राशि लेकर शो से बाहर हुए।
योगेश ने शो में बताया कि KBC उनके लिए सही समय पर आया है। उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति और अपनी जिम्मेदारियों का भी जिक्र किया। उनके पिता ड्राइवर हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति लंबे समय से चुनौतीपूर्ण रही है।
पिता हैं ड्राइवर, फिर भी नहीं छोड़ी पढ़ाई
योगेश के पिता गयाराम साहू महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस के ड्राइवर हैं। उनकी मासिक आय करीब 20 हजार रुपए बताई गई है। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद योगेश ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और IIT बॉम्बे जैसे प्रतिष्ठित संस्थान तक पहुंचे।
उनकी शिक्षा में कई लोगों ने मदद की। बिलासपुर में रोहन चावला ने उन्हें 11वीं और 12वीं की पढ़ाई मुफ्त कराई। तत्कालीन कलेक्टर कार्तिकेय गोयल ने भी शिक्षा में सहयोग किया। IIT बॉम्बे में दाखिले के दौरान मुख्यमंत्री और कलेक्टर की ओर से भी आर्थिक सहायता मिलने की बात सामने आई है।
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1.5 लाख की नौकरी छोड़कर IAS बनने का लक्ष्य
IIT बॉम्बे से पढ़ाई पूरी करने के बाद योगेश को करीब 1.5 लाख रुपए प्रतिमाह की नौकरी मिली थी। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह बड़ा अवसर था, लेकिन योगेश ने नौकरी के बजाय IAS बनने के अपने सपने को प्राथमिकता दी।
उन्होंने नौकरी छोड़कर UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। उनके पिता के मुताबिक, योगेश UPSC प्रीलिम्स भी पहले प्रयास में पास कर चुके हैं और अब मुख्य परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
मोबाइल और सोशल मीडिया से बनाई दूरी
योगेश अपनी पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर हैं। बताया गया कि वह मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते और सोशल मीडिया से भी दूरी बनाए हुए हैं। उनका पूरा ध्यान UPSC की तैयारी पर है।
भाटापारा स्टेशन पर हुआ जोरदार स्वागत
KBC में हिस्सा लेकर लौटने के बाद योगेश का भाटापारा रेलवे स्टेशन पर जोरदार स्वागत किया गया। सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने स्टेशन पहुंचकर उनका अभिनंदन किया। उनकी जीत से परिवार और गांव में खुशी का माहौल है।
योगेश की कहानी आर्थिक संघर्ष, मेहनत और बड़े लक्ष्य की मिसाल बन गई है। IIT बॉम्बे में पढ़ाई, 1.5 लाख रुपए की नौकरी छोड़ना और अब KBC में 50 लाख रुपए जीतना उनकी सफलता के सफर का अहम हिस्सा है। अब उनकी नजर UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनने पर है।




