Khelo India Tribal Games: खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में छत्तीसगढ़ ने अब तक शानदार प्रदर्शन करते हुए एक गोल्ड समेत कुल 10 मेडल अपने नाम किए हैं। इनमें से 7 मेडल सिर्फ तैराकी स्पर्धा में आए हैं, जिनमें चार सिल्वर और तीन ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके अलावा वेटलिफ्टिंग में भी राज्य ने एक गोल्ड, एक सिल्वर और एक ब्रॉन्ज हासिल किया है, जो (Chhattisgarh Sports Performance) को मजबूत करता है।
अनुष्का भगत की चमकदार वापसी
तैराकी में सबसे ज्यादा सुर्खियां अनुष्का भगत ने बटोरीं, जिन्होंने अकेले चार सिल्वर मेडल जीतकर राज्य को बड़ी सफलता दिलाई। उनकी यह उपलब्धि सिर्फ जीत तक सीमित नहीं है, बल्कि (Anushka Bhagat Comeback) की कहानी भी अपने आप में प्रेरणादायक है।
तीन साल बाद पूल में वापसी, 3 महीने में कमाल
अनुष्का पिछले तीन साल से स्विमिंग से दूर थीं, लेकिन ट्राइबल गेम्स की घोषणा ने उन्हें फिर से पानी में उतरने के लिए प्रेरित किया। दिसंबर से शुरू हुई उनकी तैयारी ने महज तीन महीने में उन्हें चार सिल्वर मेडल दिला दिए। यह सफर दिखाता है कि (Sports Comeback Story) में मेहनत और जुनून कितना बड़ा फर्क ला सकता है।
शौक से जुनून तक का सफर
अनुष्का बताती हैं कि उन्होंने तैराकी की शुरुआत किसी बड़े लक्ष्य के साथ नहीं की थी। अपनी बहन को देखकर बचपन में शुरू की गई यह आदत धीरे-धीरे जुनून में बदल गई। कम उम्र में प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना उनके करियर की मजबूत नींव बना, जो आज (Swimming Passion Journey) के रूप में सामने आया।
बंद पूल, टूटा रूटीन, फिर नई शुरुआत
कोविड के दौरान स्विमिंग पूल बंद होने से उनकी तैयारी बुरी तरह प्रभावित हुई। दो साल तक केवल ग्राउंड ट्रेनिंग करने के बावजूद प्रतियोगिताएं न मिलने से उन्होंने स्विमिंग छोड़ दी थी। लेकिन ट्राइबल गेम्स ने उन्हें फिर से एक मौका दिया, जिससे (Athlete Struggle Phase) का अंत हुआ।
पिता की मेहनत बनी ताकत
अनुष्का की सफलता के पीछे उनके पिता की बड़ी भूमिका रही है, जो पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। वे रोजाना सुबह-शाम उन्हें प्रैक्टिस के लिए ले जाते थे और अपनी ड्यूटी के साथ बच्चों की ट्रेनिंग का संतुलन बनाए रखते थे। यही सपोर्ट सिस्टम (Family Support in Sports) की अहमियत को दर्शाता है।
निखिल और न्यासा का भी योगदान
इस प्रतियोगिता में निखिल ने दो ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए, जबकि न्यासा पैकारा ने एक ब्रॉन्ज जीतकर राज्य के खाते में योगदान दिया। निखिल ने बेहतर प्रदर्शन के लिए कर्नाटक जाकर ट्रेनिंग ली, जहां की सुविधाओं ने उनके खेल को नया आयाम दिया। यह (Advanced Training Impact) का उदाहरण है।
महंगा खेल, सीमित संसाधन
कोच राजेश साहू के मुताबिक, स्विमिंग एक महंगा खेल है, जिसमें डाइट, ट्रेनिंग और उपकरणों पर भारी खर्च आता है। एक स्विमिंग कॉस्ट्यूम की कीमत 25 से 26 हजार रुपए तक होती है, जिससे कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी पीछे रह जाते हैं। यह स्थिति (Sports Infrastructure Issue) को उजागर करती है।
राष्ट्रीय स्तर की अकादमी की जरूरत
कोच ने सुझाव दिया कि राज्य में एक समर्पित राष्ट्रीय स्तर की स्विमिंग अकादमी बनाई जानी चाहिए, जहां खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के साथ रहने और खाने की सुविधाएं भी मिलें। इससे आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी और बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे, और (Sports Development Vision) को नई दिशा मिलेगी।


