सीजी भास्कर, 25 दिसंबर। आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में घुटनों की दिक्कतें अब केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रहीं। उम्र बढ़ना, मोटापा, पुरानी चोट, गठिया या जोड़ों से जुड़ी बीमारियां धीरे-धीरे घुटनों को कमजोर बना देती हैं। जब दर्द इतना बढ़ जाए कि चलना-फिरना, सीढ़ियां चढ़ना या रोज़मर्रा के काम मुश्किल हो जाएं, तब घुटनों का ट्रांसप्लांट (Knee Replacement Surgery) कई लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आता है। लेकिन यह फैसला भावनाओं में नहीं, पूरी जानकारी के साथ लेना चाहिए।
सही डॉक्टर और अस्पताल का चुनाव सबसे अहम
घुटनों का ट्रांसप्लांट एक बड़ी और तकनीकी सर्जरी है। इसलिए अनुभवी ऑर्थोपेडिक सर्जन और भरोसेमंद अस्पताल चुनना बेहद ज़रूरी (Knee Replacement Surgery) है। इस बारे में मैक्स हॉस्पिटल में कार्यरत डॉ. अखिलेश यादव का कहना है कि सर्जन का अनुभव और टीम की दक्षता सर्जरी के नतीजों को सीधे प्रभावित करती है। पहले से इलाज करा चुके मरीजों के अनुभव भी ज़रूर जानें।
सर्जरी से पहले पूरी मेडिकल जांच कराएं
ऑपरेशन से पहले शरीर की स्थिति जानना बेहद जरूरी होता है। आमतौर पर इसमें ब्लड टेस्ट, एक्स-रे, एमआरआई, ईसीजी और अन्य जरूरी जांच शामिल होती हैं। इससे यह तय होता है कि आप सर्जरी के लिए पूरी तरह फिट हैं या नहीं, और किसी संभावित जोखिम को पहले ही रोका जा सके।
नतीजों को लेकर वास्तविक उम्मीदें रखें
घुटनों का ट्रांसप्लांट दर्द कम करता है और चलने-फिरने की क्षमता में बड़ा सुधार लाता है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि घुटने बिल्कुल युवावस्था (Knee Replacement Surgery) जैसे हो जाएं। सही उम्मीदें रखने से मानसिक संतुलन बना रहता है और सर्जरी के बाद संतुष्टि भी अधिक मिलती है।
रिकवरी और फिजियोथेरेपी को हल्के में न लें
ऑपरेशन के बाद असली परीक्षा शुरू होती है—रिकवरी। नियमित फिजियोथेरेपी, डॉक्टर की बताई एक्सरसाइज़ और अनुशासित दिनचर्या से ही घुटनों की ताकत और लचीलापन लौटता है। लापरवाही करने पर सर्जरी का पूरा फायदा नहीं मिल पाता।
दवाइयों और एलर्जी की पूरी जानकारी दें
अगर आप पहले से कोई दवा ले रहे हैं या किसी दवा से एलर्जी है, तो यह जानकारी डॉक्टर को जरूर दें। कई बार छोटी-सी जानकारी छुपाने से सर्जरी के दौरान या बाद में जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
घुटनों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए ये आदतें अपनाएं
नियमित व्यायाम:
हल्की वॉक, स्ट्रेचिंग और योग से घुटनों की मांसपेशियां मजबूत रहती हैं और जोड़ों में लचीलापन बढ़ता है।
वजन नियंत्रण:
अधिक वजन सीधे घुटनों पर दबाव डालता है, जिससे दर्द और घिसाव तेज़ हो जाता है।
संतुलित आहार:
कैल्शियम, विटामिन-D और प्रोटीन से भरपूर भोजन हड्डियों को मजबूती देता है।
सुरक्षित दिनचर्या:
फिसलन वाली जगहों पर सावधानी रखें और भारी वजन उठाने से बचें, ताकि चोट का खतरा कम हो। सही जानकारी, सही डॉक्टर और सही तैयारी—इन तीनों के साथ घुटनों का ट्रांसप्लांट न सिर्फ दर्द से राहत देता है, बल्कि ज़िंदगी को फिर से सक्रिय बना सकता है।






