बिलासपुर। (Kundan NGO Scam Exposure) ने पूरे प्रदेश को हिला दिया है। रायपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर की जिद और संघर्ष ने 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के उस भ्रष्टाचार को सामने ला दिया, जो दिव्यांगों के नाम पर वर्षों से चल रहा था।
Kundan NGO Scam Exposure की शुरुआत एक आवेदन से
कुंदन सिंह ठाकुर 2008 से समाज कल्याण विभाग में संविदा कर्मचारी के तौर पर काम कर रहे थे। जब उन्होंने नियमितीकरण के लिए आवेदन किया, तब पता चला कि वे पहले से ही सहायक वर्ग-2 पद पर पदस्थ दिखाए गए हैं और 2012 से उनके नाम पर वेतन भी निकाला जा रहा है। यह चौंकाने वाला सच (Kundan NGO Scam Exposure) की नींव बना।
आरटीआई से खुला फर्जीवाड़ा
कुंदन ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी, तो खुलासा हुआ कि उनके अलावा 14 और लोगों के नाम पर फर्जी नियुक्तियां दिखाकर करोड़ों रुपये का वेतन आहरित किया गया। यहीं से मामला स्टेट रिसोर्स सेंटर (SRC) और फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर (PRRC) तक पहुंचा, जहां (Kundan NGO Scam ) के जरिए करीब 1,000 करोड़ का घोटाला सामने आया।
कुंदन की लड़ाई: नौकरी गई, हिम्मत नहीं टूटी
धमकियां, नौकरी से निकाला जाना और परिवार पर दबाव—ये सब कुंदन ने झेला। बावजूद इसके, उन्होंने जनहित याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए CBI जांच के आदेश दिए। (Kundan NGO Scam Exposure) ने साफ कर दिया कि इस पूरे प्रकरण में बड़े अफसरों की भूमिका रही है।
आरटीआई से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
30 जनवरी 2020 को हाई कोर्ट ने CBI जांच का आदेश दिया। हालांकि कई अफसरों ने इसे सुप्रीम कोर्ट तक चुनौती दी। तत्कालीन मुख्य सचिव विवेक ढांड, आईएएस एमके राउत, आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल, सतीश पांडे और पीपी श्रोती समेत कई अधिकारियों के नाम इस मामले में सामने आए। (Kundan NGO Scam Exposure) ने दिखा दिया कि किस तरह कागजों पर बने संस्थानों के जरिए सरकारी फंड की लूट हो रही थी।
पिता और वकील का मिला साथ
नौकरी खोने के बावजूद कुंदन पीछे नहीं हटे। उनके पिता हरि सिंह ठाकुर और अधिवक्ता देवर्षि ठाकुर ने हौसला दिया। वकील देवर्षि ने बिना फीस लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और खुद खर्च उठाया। कुंदन कहते हैं, पिता हमेशा कहते थे—सच परेशान हो सकता है, लेकिन जीत उसी की होगी।
जीत के दिन पिता ने ली आखिरी सांस
फैसले वाले दिन कुंदन के 98 वर्षीय पिता ने दुनिया छोड़ दी। उनके लिए यह पल खुशी और गम दोनों लेकर आया। (Kundan NGO Scam Exposure) ने साबित किया कि एक व्यक्ति की जिद पूरे सिस्टम को हिला सकती है।





