सीजी भास्कर, 23 दिसंबर। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बांसला में इन दिनों तेंदुओं की मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ठंड का मौसम शुरू होते ही गांव से सटी पहाड़ियों में तेंदुए लगातार देखे जा रहे हैं, जिससे पूरे इलाके में तेंदुए का आतंक (Leopard Terror) फैल गया है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सुबह के समय पहाड़ी पर बड़े पत्थरों के ऊपर दो तेंदुए एक साथ बैठकर धूप सेंकते हुए नजर आते हैं। इस दृश्य के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसने गांव के लोगों की दहशत और बढ़ा दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि ये तेंदुए कोई नया खतरा नहीं हैं, बल्कि पिछले काफी समय से बांसला की पहाड़ियों को अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। बीते महीनों में इन्होंने कई मवेशियों और पालतू पशुओं को अपना शिकार बनाया है। गाय, बकरी और मुर्गियों के गायब होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अब तक किसी इंसान पर हमला नहीं हुआ है, लेकिन जिस तरह से तेंदुओं की गतिविधियां बढ़ी हैं, उससे गांव में तेंदुओं की दहशत (Leopard Terror) को लेकर भय का माहौल बना हुआ है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ग्रामीणों ने पहाड़ी पर स्थित मंदिर के आसपास भी तेंदुओं की हलचल देखी। दिन ढलते ही ये वन्यजीव भोजन की तलाश में गांव की ओर रुख कर रहे हैं। कई बार तेंदुओं को घरों की बाड़ियों और आंगनों में घुसकर मुर्गियों का शिकार करते हुए देखा गया है। रात के समय गांव में सन्नाटा पसरा रहता है, लोग दरवाजे बंद कर घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष रूप से बाहर निकलने से रोका जा रहा है, क्योंकि गांव में फैला तेंदुआ खौफ (Leopard Terror) कभी भी जानलेवा साबित हो सकता है।
ग्रामीणों में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका कहना है कि तेंदुओं की लगातार मौजूदगी की सूचना दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं। न तो नियमित गश्त बढ़ाई गई है और न ही पिंजरा लगाने जैसी प्रभावी कार्रवाई की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण उन्हें अपने हाल पर छोड़ दिया गया है, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग तत्काल सक्रिय होकर पहाड़ी क्षेत्र में ही वन्यजीवों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था करे, ताकि तेंदुए रिहायशी इलाकों की ओर न आएं। इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में कैमरा ट्रैप लगाए जाएं, रात के समय गश्त बढ़ाई जाए और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। गांव में पिंजरा लगाकर या अन्य सुरक्षित उपायों से तेंदुओं को पकड़कर जंगल के अंदर छोड़े जाने की भी मांग की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे लगातार भय के माहौल में जीवन जी रहे हैं। सुबह खेतों की ओर जाना हो या शाम को बच्चों का बाहर निकलना, हर कदम पर डर बना रहता है। यदि समय रहते प्रशासन और वन विभाग ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो बांसला गांव में तेंदुओं का आतंक (Leopard Terror) किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकता है।


