सीजी भास्कर, 21 मार्च। बस्तर की धरती एक बार फिर अपनी अनूठी परंपराओं और जीवंत संस्कृति का विराट रूप दिखाने (Lingo Dev Karsad Jatra) जा रही है। कांकेर जिले के सेमरगांव में 2 से 4 अप्रैल तक लिंगो देव का भव्य करसाड़ जात्रा मेला आयोजित होगा, जहां आस्था, परंपरा और जनजातीय संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
लिंगो देव: केवल देवता नहीं, समाज के गुरु
आदिवासी समाज में लिंगो देव को सिर्फ देव स्वरूप नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और संरक्षक के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि उन्होंने समाज को संगठित किया और जीवन जीने की दिशा दी। सेमरगांव स्थित लिंगो धाम को एक पवित्र पेनस्थल माना जाता है, जहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु अपनी आस्था लेकर पहुंचते हैं।
देशभर से पहुंचेगा आस्था का कारवां
करसाड़ जात्रा मेला केवल स्थानीय आयोजन नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय सांस्कृतिक उत्सव का रूप (Lingo Dev Karsad Jatra) ले चुका है। छत्तीसगढ़ के साथ-साथ महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश और झारखंड से श्रद्धालु और देव स्वरूप यहां पहुंचेंगे। इस दौरान सैकड़ों देवी-देवताओं की डोलियां, छतर, आंगा और पारंपरिक प्रतीक एक साथ नजर आएंगे, जो इस मेले को “देव सम्मेलन” जैसा दिव्य स्वरूप देते हैं।
मांदर की थाप पर झूमेगा पूरा इलाका
मेले के दौरान मांदर, ढोल और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देगी। पारंपरिक वेशभूषा में सजे श्रद्धालु नृत्य करते हुए अपने देवताओं के साथ शामिल होंगे। यह दृश्य केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और एकता का भी प्रतीक बनता है।
सख्त परंपराएं, अटूट अनुशासन
लिंगो देवगुड़ी में पूजा पूरी तरह पारंपरिक नियमों के अनुसार होती है। यहां प्रवेश और पूजा से जुड़े नियम बेहद सख्त हैं, जिनका पालन पीढ़ियों से किया जा रहा है। पूरे आयोजन का संचालन 14 भाइयों की पारंपरिक समिति करती है, जो इस विरासत को संभालने का दायित्व निभाती है।
आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
यह मेला केवल गोंड या आदिवासी समाज तक सीमित नहीं है। कलार, तेली, राउत सहित कई अन्य समुदाय भी इसमें शामिल होते हैं। इस तरह यह आयोजन सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन चुका है।
प्रशासन की भागीदारी, सुविधाओं का विस्तार
तीन साल में एक बार लगने वाले इस मेले में इस बार जिला प्रशासन भी सक्रिय रूप से जुड़ (Lingo Dev Karsad Jatra) रहा है। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्थाएं और सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। तैयारियों का जायजा लेने जनप्रतिनिधियों ने भी दौरा किया है, और इस बार आयोजन में बड़े स्तर पर सहभागिता के संकेत मिल रहे हैं।
निष्कर्ष: परंपरा, पहचान और प्रकृति का उत्सव
लिंगो देव का करसाड़ जात्रा मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा का उत्सव है। यह महापर्व आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने और दुनिया को जनजातीय संस्कृति की समृद्धता दिखाने का माध्यम बनता जा रहा है।


